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ज्येष्ठ का दूसरा बड़ा मंगल 24 मई को:बुधादित्य और त्रिग्रही योग, इस संयोग में हनुमान पूजा से दूर होती है परेशानियां

एक महीने पहले
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ज्योतिषियों के अनुसार ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को बुधादित्य और त्रिग्रही योग रहेगा। इस दिन मंगल अपने मित्र बृहस्पति के साथ उनकी ही राशि में रहेगा। जिससे इसका शुभ फल और बढ़ जाएगा। बुधादित्य और त्रिग्रही संयोग में ज्येष्ठ महीने का मंगलवार होने से धार्मिक क्षेत्र में गति बढ़ेगी तथा नए उपक्रमों के लिए अच्छा वक्त आएगा। देश के लिए शुभ समय रहेगा। पारंपरिक मान्यता के मुताबिक ज्येष्ठ मास के मंगलवार को बड़ा मंगल भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन व्रत रखने और हनुमान जी की पूजा करने से हर तरह के दोष खत्म हो जाते हैं।

बुधादित्य और त्रिग्रही युति में मंगलवार
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि ग्रह गोचर में शुक्र, मंगल और गुरु की त्रिग्रही युति मीन राशि में बन रही है। वहीं, वृष राशि में सूर्य और बुध मिलकर बुधादित्य योग बना रहे हैं। जिससे लोग दान-धर्म और पूजा-पाठ में और ज्यादा समय देंगे। सितारों के शुभ संयोग में किए गए व्रत और पूजा का पुण्य और बढ़ जाएगा।

मंगलवार के अधिपति हनुमानजी
मई का मंगलवार इसलिए खास है, क्योंकि ये ज्येष्ठ महीने में है। इस महीने का स्वामी मंगल है। वहीं, मंगलवार के अधिपति हनुमानजी हैं। ज्येष्ठ मास में ही श्रीराम से हनुमानजी की पहली मुलाकात हुई थी। इसलिए इस दिन जरूरतमंद लोगों की मदद और दान करने से कई गुना शुभ फल मिलता है। इस दिन बूढ़े और बीमार लोगों की मदद करने से हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं।

क्या करें मंगलवार को
श्री रामचरितमानस के मुताबिक मंगलवार को ही हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसी वजह से हर मंगलवार हनुमान जी की पूजा की जाती है। भगवान के सामने धूप-दीप जलाकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। इस दिन किसी गौशाला में हरी घास और धन दान करें।

ग्रहों के सेनापति मंगल
ज्योतिष में बताए नौ ग्रहों में मंगल को सेनापति माना जाता है। मंगल ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। ये भूमि पुत्र हैं। मंगल का जन्म स्थान मध्य प्रदेश के उज्जैन में माना गया है। मंगल देव को लाल फूल, लाल गुलाल, मसूर दाल विशेष रूप से चढ़ाई जाती है। इनकी पूजा में ऊँ भौमाय नमः मंत्र का जप करना चाहिए। मंगलवार का कारक ग्रह मंगल है। इस वजह से ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को मंगल ग्रह की पूजा करने की परंपरा है।

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