व्रत और पूजा विधि:उत्पन्ना एकादशी व्रत से मिलता है यज्ञ, तीर्थ स्नान और दान से भी ज्यादा पुण्य

2 महीने पहले
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  • मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि से हुई थी एकादशी व्रत की शुरुआत

30 नवंबर, मंगलवार को मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। पुराणों में कहा गया है कि इस व्रत से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कम ही लोग जानते हैं कि एकादशी एक देवी थी और इस तिथि पर भगवान विष्णु से प्रकट हुई थीं। इस कारण इसे उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। इसी दिन से एकादशी व्रत की शुरुआत हुई थी।

उत्पन्ना एकादशी व्रत का महत्व
1,
मान्यता है कि जो मनुष्य उत्पन्ना एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करता है, वह सभी तीर्थों का फल व भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करता है।
2. व्रत के दिन दान करने से लाख गुना वृद्धि के फल की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति निर्जल संकल्प लेकर उत्पन्ना एकादशी व्रत रखता है, उसे मोक्ष व भगवान विष्णु की प्राप्ति होती है।
3. ये व्रत रखने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से अश्वमेघ यज्ञ, तीर्थ स्नान व दान आदि करने से भी ज्यादा पुण्य मिलता है।

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