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तिल चतुर्थी रविवार को:31 जनवरी को गौरी-गणेश का संयोग बनने से इस दिन व्रत और पूजा करना शुभ

3 महीने पहले
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  • 31 जनवरी को चतुर्थी तिथि में ही होगी चंद्रमा की पूजा
  • विद्वानों का कहना है कि तृतीया और चतुर्थी तिथि के संयोग में ही किया जाना चाहिए ये व्रत

माघ महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को तिल संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत किया जाता है। इस दिन गणेशजी की विधि पूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाले समस्त प्रकार के कष्टों को दूर करने में मदद मिलती है। इस पर्व पर गणेश जी को तिल और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है और इसे प्रसाद के रूप में खाने की परंपरा है, इसलिए इसे तिलकुटा या तिल चौथ भी कहते हैं। पद्म पुराण के मुताबिक इसी दिन कार्तिकेय के साथ पृथ्वी की परिक्रमा लगाने की प्रतिस्पर्धा में गणेशजी ने पृथ्वी के बजाय भोलेनाथ और मां पार्वती की सात बार परिक्रमा की थी।

31 को ही मनाना श्रेष्ठ काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र का कहना है कि 31 जनवरी, रविवार को तृतीया तिथि शाम को सूर्यास्त तक रहेगी इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी जो कि अगले दिन सूर्यास्त तक रहेगी। इस दिन यानी चतुर्थी तिथि में ही चंद्रमा उदय होगा। ग्रंथों में बताया गया है कि तृतीया तिथि के साथ आने वाली चतुर्थी को ही व्रत और पूजा करनी चाहिए। क्योंकि तृतीया की स्वामी गौरी यानी देवी पार्वती और चतुर्थी के गणेश हैं। इसलिए गौरी-गणेश के शुभ संयोग में की गई पूजा और व्रत से सौभाग्य बढ़ता है। इस संयोग के प्रभाव से मनोकामना भी पूरी होती है।

पूजा विधि और मुहूर्त चतुर्थी तिथि 31 जनवरी, रविवार को तकरीबन रात 8.20 से शुरू होगी। चंद्रमा करीब रात 8.40 पर दिखेगा। इसी तिथि में चंद्रमा के दर्शन कर के अर्घ्य दिया जाना चाहिए। चतुर्थी तिथि अगले दिन यानी 1 फरवरी को शाम करीब साढ़े 6 बजे खत्म हो जाएगी। पूजा विधि : संकट चौथ पर मिट्टी से गणेशजी बनाएं और पूजा करें। इस दिन गणेशजी को पीले कपड़ें पहनाएं। शाम को चंद्रमा को जल देकर व्रत पूरा करें। तिल और गुड़ का भोग लगाएं। प्रसाद में गुड़ और तिल दें।

जीवन में सुख-समृद्धि लाता है यह व्रत इस दिन मां अपने बच्चों के लिए व्रत रखती है। ऐसा माना जाता है कि जो बच्चे गंभीर रोग से पीड़ित होते हैं, उनके लिए यदि मां इस दिन व्रत रखे तो लाभ मिलता है। वहीं यह व्रत बच्चों को बुरी नजर से भी बचाता है। इस दिन व्रत रखने से बच्चे के जीवन से कई तरह के संकट दूर रहते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। वहीं इस व्रत को संतान के लिए श्रेष्ठ माना गया है। मां द्वारा रखा जाने वाला यह व्रत बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधा को भी दूर करने वाला माना गया है। संतान पर भगवान गणेश की कृपा और आशीर्वाद बना रहता है। इस दिन मां अपने बच्चों के लिए निर्जला व्रत भी रखती है। इस दिन भगवान गणेश को तिल, गुड और गन्ने का भोग लगाया जाता है।

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