• Hindi News
  • Jeevan mantra
  • Dharm
  • Fathers Day Quotes, Lesson Of Lord Krishna And Lord Shiva, Family Management Tips, Father And Teachings For Child,

फादर्स डे 19 जून को:शास्त्रों में बताए गए पिता और उनकी सीख: हर गलती का फल जरूर मिलता है, संतान को गलत काम न करने दें

15 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

रविवार, 19 जून को फादर्स डे है। ये दिन पिता को समर्पित है। किसी भी व्यक्ति के लिए पिता का महत्व सबसे अधिक होता है। पिता की दी हुई सीख और मार्गदर्शन को जीवन में उतार लिया जाए तो संतान संस्कारी और सफल हो सकती है। रामायण और महाभारत जैसे शास्त्रों में भी कई पिता के बारे में बताया गया है। जानिए शास्त्रों में बताए गए कुछ खास पिता और उनकी सीख...

शिव जी - जब समाज को संतान की जरूरत हो तो उसे न रोकें

शिव जी और देवी पार्वती के पुत्र कार्तिकेय स्वामी का पालन माता-पिता से दूर एक वन में कृतिकाओं ने किया था। काफी समय बाद में जब शिव जी को कार्तिकेय के बारे में मालूम हुआ तो उन्हें कैलाश बुलाया गया। उस समय तारकासुर को वर मिला हुआ था कि शिव जी का पुत्र ही उसका वध करेगा। तारकासुर की वजह से सभी देवता बहुत त्रस्त थे। देवता शिव जी के पास पहुंचे और कार्तिकेय स्वामी से तारकासुर का वध करने की प्रार्थना करने लगे। शिव जी ने बहुत समय बाद आए हुए अपने पुत्र कार्तिकेय को देवताओं की मदद के लिए तुरंत भेज दिया था। शिव जी ने संदेश दिया है कि समाज को जब भी हमारी संतान की जरूरत हो तो उसे रोकना नहीं चाहिए।

राजा दशरथ - जब भी किसी को वचन दें तो सोच-समझकर दें

रामायण में राजा दशरथ श्रीराम के बहुत अधिक प्रेम करते थे। कैकयी को दिए हुए वचनों की वजह से श्रीराम को वनवास जाना पड़ा था। जब कैकयी को वचन दिए थे, तब उन्होंने सोचा नहीं था कि कैकयी ऐसे वचन भी मांग सकती है। श्रीराम के वनवास जाने के बाद वे अधिक दिनों तक जीवित नहीं रह सके। अंतिम समय में दशरथ को अपनी एक गलती याद आ रही थी। उन्होंने गलती से श्रवण कुमार को बाण मार दिया था। श्रवण कुमार के माता-पिता ने ही दशरथ को पुत्र वियोग में तड़पने का शाप दिया था। दशरथ की सीख यही है कि हमारा भाग्य हमारे कर्मों से ही बनता है और कभी भी बिना सोचे-समझे किसी को वचन नहीं देना चाहिए।

रावण- पिता को गलत कामों से बचना चाहिए

रावण का पुत्र था मेघनाद। मेघनाद बहुत ही शक्तिशाली था, उसने देवराज इंद्र को भी पराजित कर दिया था, इसी वजह से उसे इंद्रजीत भी कहा जाता था, लेकिन रावण की अहंकार और अधर्म की वजह से श्रीराम-लक्ष्मण से युद्ध के समय मेघनाद को अपने प्राण गंवाने पड़े। पिता को गलत कामों से बचना चाहिए, वर्ना पिता के गलत कामों का फल संतान को भोगना पड़ता है।

बाली - संतान को सही काम करने की सलाह दें

सुग्रीव का भाई था बाली। श्रीराम ने अपने मित्र सुग्रीव के दुखों को दूर करने के लिए बाली को बाण मार दिया था। तब बाली ने अंतिम समय में उसके पुत्र अंगद से सीख दी थी कि देश, काल और परिस्थिति को समझकर सही निर्णय लेना चाहिए। बाली को अपनी गलतियों का अहसास हो गया था, इस कारण बाली ने अंगद को श्रीराम की सेवा में रहने के लिए कहा था।

धृतराष्ट्र - संतान के गलत कामों को नजर अंदाज न करें

महाभारत में धृतराष्ट्र ने हमें सीख दी है कि कभी भी संतान के गलत कामों को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। संतान कोई गलत काम करती है तो उसे रोकना चाहिए। धृतराष्ट्र ने पुत्र मोह में दुर्योधन को अधर्म करने से नहीं रोका, इस कारण उनके पूरे वंश का ही नाश हो गया।

अर्जुन - संतान को अधूरा ज्ञान न दें

अर्जुन और सुभद्रा का पुत्र था अभिमन्यू। जब सुभद्रा गर्भवती थी तो अर्जुन सुभद्रा को चक्रव्यूह भेदने का रहस्य बता रहे थे। उस समय बीच में ही सुभद्रा को नींद आ गई थी। सुभद्रा के गर्भ में अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदने का रहस्य सुन रहा था, लेकिन माता के सोने की वजह से वह पूरी रहस्य जान नहीं सका। बाद में जब महाभारत युद्ध हुआ था तो अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंस गया था और कौरवों ने उसका वध कर दिया था। पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि संतान को किसी बात का अधूरा ज्ञान न हो। संतान को हर काम का पूरा ज्ञान देने की कोशिश करनी चाहिए। अधूरा ज्ञान हमेशा खतरनाक होता है।

श्रीकृष्ण - संतान की खुशी को सबसे अधिक महत्व देना चाहिए

श्रीकृष्ण के एक पुत्र का नाम था सांब। सांब दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा से प्रेम करता था। श्रीकृष्ण और दुर्योधन, दोनों एक-दूसरे को पसंद नहीं करते थे, लेकिन श्रीकृष्ण ने दुर्योधन को समझाया कि हमारी शत्रुता की वजह से बच्चों की खुशी नहीं छिनना चाहिए। श्रीकृष्ण के समझाने के बाद दुर्योधन भी अपनी पुत्री का विवाह सांब से करवाने के लिए तैयार हो गया था।