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  • Four Days Of Tamil Festival From Today On Makar Sankranti, Special Kheer Is Made For Sun Worship, Which Is Called Pongal.

चार दिनों का तमिल महोत्सव आज से:मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा के लिए बनाते हैं खास खीर, जिसे कहते हैं पोंगल

16 दिन पहले
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दक्षिण भारत में तमिलनाडु के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला पोंगल दीपावली की तरह ही खास होता है। ये 4 दिनों का त्योहार होता है। जिसमें पहले घरों की साफ-सफाई, सजावट फिर नई फसल को नैवेद्य सूर्य को लगाना इसके बाद खेती में इस्तेमाल होने वाले गाय बैलों की पूजा और उनकी सजावट करना। फिर आखिरी दिन परिवार वालों से मिलकर शुभकामनाएं देने का दौर चलता है।

मकर संक्रांति पर मनाते हैं थाई पोंगल

तमिल सौर कैलेण्डर के मुताबिक, ये नए महीने के पहले दिन मनाया जाने वाला पर्व होता है। पोंगल महोत्सव में दूसरा दिन सबसे खास होता है। इसे थाई पोंगल कहते हैं। इस दिन सूर्य पूजा की जाती है और नई फसल को पका कर उसका नैवेद्य भगवान को लगाया जाता है।

पहला दिन (भोगी पंडिगाई): इस दिन घर की सफाई की जाती है। इस्तेमाल न आने वाली और गैर जरूरी चीजें घर से निकाली जाती हैं। फिर पूरे घर को धोकर, आंगन में रंगोली सजाई जाती है। साथ ही अलाव जलाया जाता है। इस आग के पास युवा रात भर भोगी कोट्टम (एक तरह का ढोल) बजाते हैं, जो ईश्वर के प्रति सम्मान और बुराईयों के अंत की भावना को दिखाता है।

दूसरा दिन (थाई पोंगल): इस दिन मिट्टी के नए बर्तन में कच्चा दूध, गुड़, सूखे मेवे और नई फसल के चावलों को उबालकर खास नैवेद्य बनाया जाता है। इसे ही पोंगल कहते हैं। भगवान सूर्य को इसका भोग लगाया जाता है। फिर प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

तीसरा दिन (मट्टू पोंगल): ये महोत्सव का तीसरा दिन है। इस दिन खेती में इस्तेमाल होने वाले बैलों को स्नान कराने के बाद सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। तमिल मान्यताओं के मुताबिक, मट्टू भगवान शंकर की सवारी है। जिसे शंकर भगवान ने धरती पर खेती के काम में किसानों की मदद के लिए भेजा था। इस दिन कुछ जगह बहनें, अपने भाइयों की खुशहाली के लिए पूजा करती है और बदले में उन्हें उपहार मिलता है।

चौथा दिन (कानुम पोंगल): ये आखिरी दिन होता है। इस दिन आम और नारियल के पत्तों का तोरण बनाकर घर के दरवाजे पर लगाया जाता है। महिलाएं कोलम यानी रंगोली बनाती हैं। लोग नए कपड़े पहनते है और एक-दूसरे के यहां पोंगल और मिठाई भेजते हैं। ये पारिवारिक और सामाजिक मेल मिलाप वाला दिन होता है। सभी एक दूसरे को भगवान सूर्य का प्रसाद बांटते हैं और शुभकामनाएं देते हैं।

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