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गणेश जी के 9 प्राचीन मंदिर:हजार साल से ज्यादा पुरानी है मधुर महागणपति प्रतिमा, कनिपक्कम गणेश 900 साल और चिंतामण गणेश की मूर्तियां हैं करीब 1100 साल पुरानी

15 दिन पहले
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आज (10 सितंबर) गणेश चतुर्थी है। इस दिन गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने के साथ ही गणेश मंदिरों में दर्शन करने का विशेष महत्व है। देशभर में गणेश जी के कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका इतिहास काफी पुराना है। सभी मंदिरों की खास बातें अलग हैं। यहां जानिए देश के 10 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में...

1100 साल पुरानी है उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर की प्रतिमाएं

मध्यप्रदेश में इंदौर के पास उज्जैन में 9वीं-10वीं शताब्दी का गणेश मंदिर स्थापित है। इसे चिंतामण गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है। ये मंदिर परमार कालीन है। मंदिर गणेश जी के तीन स्वरूपों की प्रतिमाएं हैं। यहां भगवान चिंतामन, इच्छामन, सिद्धिविनायक स्वरूप के दर्शन देते हैं। आज के मंदिर की इमारत होलकर वंश की महारानी अहिल्याबाई ने बनवाई थी। मंदिर की एक कथा श्रीराम से जुड़ी है। मान्यता है कि यहां तीन गणेश प्रतिमाएं भगवान राम, लक्ष्मण और सीता ने स्थापित की थी। लक्ष्मण ने यहां एक बावड़ी का निर्माण भी किया था, जिसे लक्ष्मण बावड़ी कहते हैं।

1000 साल पुराना है केरल का मधुर महागणपति मंदिर

केरल की मधुरवाहिनी नदी के किनारे पर मधुर महागणपति मंदिर 10वीं शताब्दी का माना जाता है। मंदिर कासरगोड से करीब 8 किमी दूर स्थित है। पुराने समय में ये मंदिर शिव जी का था, लेकिन बाद में ये गणेश जी के प्रमुख मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया। यहां कथा प्रचलित है कि जब ये शिवजी का मंदिर था, तब यहां एक पुजारी और उनका बेटा भी रहता था। एक दिन पुजारी के बेटे ने मंदिर की दीवार पर गणेशजी का चित्र बनाया। कुछ समय बाद ये चित्र आकार लेने लगा। कुछ ही समय में वह चित्र मूर्ति की तरह बन गया। दीवार पर चमत्कारी रूप से उभरी इस प्रतिमा की वजह से मंदिर प्रसिद्ध हो गया।

1000 साल पुराना है राजस्थान का रणथंभौर मंदिर

राजस्थान के सवाई माधौपुर के पास रणथंभौर किले में गणेशजी का एक प्राचीन मंदिर है। मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी का माना जाता है। इसे यहां के राजा हमीर ने बनवाया था। मंदिर में त्रिनेत्र गणेश स्थापित हैं। रणथंबोर गणेशजी को हर रोज भक्तों की हजारों चिट्ठियां मिलती हैं। परेशानियां और मनोकामनाएं लिखी रहती हैं। चिट्ठी या कार्ड पर श्री गणेशजी का पता, रणथंबोर किला, जिला सवाई माधोपुर राजस्थान लिखा जाता है और भक्त की चिट्ठी भगवान तक पहुंच जाती है।

900 साल से ज्यादा पुराना है कनिपक्कम गणेश मंदिर

आंध्रप्रदेश में चित्तूर जिले के इरला मंडल के कनिपक्कम गणेश मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी का है। यहां की मूर्ति काले ग्रेनाइट की एक बड़ी चट्टान को ही तराश कर बनाई गई है। यहां की खास बात ये है कि मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा हर साल थोड़ी सी बड़ी हो जाती है। इसे पानी के देवता का मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में चोल राजा कुलोठुन्गा चोल प्रथम ने करवाया था। इसके बाद विजयनगर के राजा ने 1336 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।

500 साल से ज्यादा पुराना है जयपुर के मोती डूंगरी मंदिर

राजस्थान में जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर की प्रतिमा करीब 500 साल पुरानी है। गणेश जी की ये मूर्ति 1761 में जयपुर के राजा माधौसिंह की रानी के पैतृक गांव मावली (गुजरात) से लाई गई थी। इस मूर्ति का इतिहास 500 सालों से ज्यादा पुराना माना जाता है। गणेश जी के भक्त बड़ी संख्या में नए वाहन लेकर यहां आते हैं और पूजन करवाते हैं। गणेश उत्सव के समय हर रोज यहां हजारों भक्त पहुंचते हैं।

350 साल से ज्यादा पुराना है पुडुचेरी का मनाकुला गणेश मंदिर

भारत के दक्षिण क्षेत्र में पुडुचेरी का मनाकुला विनायगर गणेश मंदिर करीब 350 साल पुराना है। मान्यता है कि 1666 में इस क्षेत्र में कुछ फ्रांसीसियों का दल आया था, मंदिर का इतिहास उससे भी पहले का है। मंदिर का मुख समुद्र की ओर है। इसीलिए, इसे भुवनेश्वर गणेश मंदिर भी कहा जाता हैं। फ्रांसीसी लोगों ने इस मंदिर की प्रतिमा को कई बार समुद्र में फेंका, लेकिन हर बार ये प्रतिमा किनारे पर आ जाती थी। तमिल में बालू रेत को मनल और सरोवर को कुलन कहा जाता है। पुराने समय में गणेश प्रतिमा के आसपास ढेर सारी बालू रेत थी, इसलिए ये मंदिर मनाकुला विनायगर गणेश मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

275 साल से ज्यादा पुराना है खजराना गणेश मंदिर

मध्य प्रदेश के इंदौर का खजराना गणेश मंदिर करीब 275 साल से ज्यादा पुराना है। 1735 में होलकर वंश की महारानी अहिल्या बाई ने मंदिर को बनवाया था। मंदिर में स्थापित मूर्ति का इतिहास उससे भी ज्यादा पुराना है। मंदिर में गणेश जी की करीब 3 फीट ऊंची प्रतिमा है। भगवान रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजित हैं। मान्यता है कि इस क्षेत्र के एक पुजारी को सपना आया था कि यहां गणेश जी प्रतिमा दबी हुई है। ये बात रानी अहिल्याबाई को मालूम हुई तो उन्होंने यहां खुदाई करवाई थी। खुदाई के दौरान ये मूर्ति मिली थी।

200 साल से ज्यादा पुराना है सिद्धिविनायक मंदिर

महाराष्ट्र में मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। इसका इतिहास दो सौ साल से ज्यादा पुराना है। मंदिर की स्थापना 19 नवंबर 1801 को हुई थी। मंदिर के अंदर एक मंडप पर सिद्धि विनायक प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की छत पर करीब 3.5 किलो का सोने का कलश लगा हुआ है। मंदिर के अंदर में सोने की परत चढ़ाई हुई है। सिद्धिविनायक की ये मूर्ति काले पत्थर से बनी है। ये करीब ढाई फीट ऊंची और दो फीट चौड़ी प्रतिमा है। मूर्ति की सूंड दाहिनी ओर है। मूर्ति के माथे पर एक नेत्र है जो कि शिवजी के तीसरे नेत्र की तरह दिखता है। फूल माला की जगह नागदेव लिपटे हुए हैं।

200 साल से ज्यादा पुराना है दगड़ू गणेश मंदिर

महाराष्ट्र के पुणे का दगड़ू गणेश मंदिर 18वीं शताब्दी में बनाया गया था। मंदिर के संबंध में मान्यता है कि 18वीं शताब्दी में जब प्लेग महामारी फैली थी, उस समय यहां के व्यापारी दगड़ू सेठ हलवाई के बेटे की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद व्यापारी के गुरु माधवनाथ महाराज के कहने पर यहां गणेश मंदिर बनवाया गया। दगड़ू सेठ हलवाई ने मंदिर बनवाया था, इसलिए मंदिर का नाम दगड़ू गणेश पड़ गया। मंदिर में करीब साढ़े फीट ऊंची और चार चौड़ी गणेश प्रतिमा स्थापित है।