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गणेश चतुर्थी 10 सितंबर को:मिट्टी की गणेश प्रतिमा ही नहीं, हल्दी और गोबर से बनी प्रतिमा भी घर में कर सकते हैं स्थापित

19 दिन पहले
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शुक्रवार, 10 सितंबर से गुरुवार, 19 सितंबर तक गणेश उत्सव मनाया जाएगा। प्रथम पूज्य गणेशजी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा काफी पुराने समय से चली आ रही है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत गणेशजी के पूजन के साथ ही की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से काम बिना किसी विघ्न के पूरे हो जाते हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार मिट्टी की गणेश प्रतिमा के साथ ही गणेशजी के अन्य स्वरूपों को भी घर में स्थापित कर सकते हैं। जानिए श्रीगणेश के 4 ऐसे स्वरूप, जिन्हें गणेश चतुर्थी पर घर में स्थापित कर सकते हैं...

हल्दी की गांठ से बने गणेश

हल्दी की ऐसी गांठ चुनें, जिसमें श्रीगणेश की आकृति दिखाई दे रही है। इस गांठ में गणेशजी का ध्यान करते हुए हर रोज पूजन करना चाहिए। अगर गांठ न मिले तो पीसी हुई हल्दी में पानी मिलाकर भी गणेश प्रतिमा बना सकते हैं। ये गणेश प्रतिमा भी पूजन के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। अगर सोने की धातु से बनी गणेश प्रतिमा नहीं है तो हल्दी से बनी गणेश प्रतिमा का पूजन किया जा सकता है। सोने से बनी और हल्दी से बनी गणेश प्रतिमा एक समान पुण्य फल देने वाली मानी गई है।

गोबर से बनी गणेश प्रतिमा

गाय के गोबर यानी गोमय में महालक्ष्मी का निवास माना गया है। इसी वजह से गोमय से बनी गणेश मूर्ति की पूजा लाभ देने वाली मानी गई है। गोबर से गणेशजी की आकृति बनाएं और इस प्रकार तैयार की हुई गणेश प्रतिमा का पूजन करें।

लकड़ी की गणेश प्रतिमा

भगवान की मूर्तियां बनाने के लिए पीपल, आम, नीम आदि की लकड़ी बहुत शुभ मानी गई है। रोज इस प्रतिमा की पूजा करने पर घर का वातावरण शुभ बना रहता है और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इन लकड़ियों से बनी गणेश प्रतिमा को घर के मुख्य दरवाजे के बाहर ऊपरी हिस्से पर भी स्थापित कर सकते हैं।

श्वेतार्क गणेश

सफेद आंकड़े की जड़ में गणेशजी की आकृति बन जाती है। इसे श्वतार्क गणेश कहा जाता है। इस मूर्ति की पूजा से सुख-सौभाग्य बढ़ता है। श्वेतार्क गणेश की मूर्ति घर लेकर आएं और नियमित रूप से विधि-विधान के साथ पूजा करनी चाहिए।