चंद्र पूजा का शुभ योग:हलहारिणी अमावस्या 28 जून को; नदी में स्नान करने नहीं पा रहे हैं तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर करें स्नान

एक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

इस साल आषाढ़ मास की अमावस्या दो दिन रहेगी। मंगलवार, 28 जून को हलहारिणी अमावस्या है और 29 जून को भी अमावस्या रहेगी। अमावस्या पर नौ ग्रहों में से एक चंद्र देव की विशेष पूजा करने की परंपरा है। चंद्र को मन का कारक ग्रह माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्र की स्थिति सही नहीं होती है, उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। चंद्र देव के लिए अमावस्या पर विशेष पूजा करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक अमावस्या पर चंद्र दिखाई नहीं देता है, इस दिन चंद्र देव की प्रतिमा की विशेष पूजा करनी चाहिए। चंद्र देव का जल और दूध से अभिषेक करें। पूजन सामग्री चढ़ाएं। मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप करें।

अमावस्या पर करनी चाहिए पवित्र नदी में स्नान

  • अमावस्या तिथि को भी एक पर्व माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का और तीर्थ दर्शन का विशेष महत्व है।
  • सुबह-सुबह नदी में स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। दान-पुण्य और करना चाहिए। इसी मान्यता की वजह से देशभर की सभी पवित्र नदियों और तीर्थों में अमावस्या पर भक्तों की भीड़ लगी रहती है।

अमावस्या पर घर में ऐसे कर सकते हैं स्नान

  • इस पर्व पर जो लोग किसी पवित्र नदी में स्नान करने नहीं जा पा रहे हैं, उन्हें पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर घर में ही स्नान कर लेना चाहिए। इस दौरान सभी पवित्र नदियों का जैसे गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, अलकनंदा, नर्मदा का ध्यान करना चाहिए।
  • स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरें और सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें। इसके बाद घर के मंदिर में अपने इष्टदेव की विशेष पूजा करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री, धन और अनाज का दान करें।
  • अमावस्या की दोपहर में पितरों के लिए धूप-ध्यान करना चाहिए। इसके लिए जलते हुए कंडों पर गुड़-घी अर्पित करें और पितरों का ध्यान करें।