नरसिंह प्रकट उत्सव शनिवार को:हिरण्यकश्यपु के वध के बाद भी नरसिंह जी नहीं हुए शांत तो शिव जी ने लिया उनसे ज्यादा शक्तिशाली अवतार

एक महीने पहले
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शनिवार (14 मई) को भगवान नरसिंह जी का प्रकट उत्सव है। नरसिंह जी ने प्रहलाद की रक्षा के लिए एक अवतार लिया और हिरण्यकश्यपु का वध कर दिया था। नरसिंह जी भगवान विष्णु के उग्र अवतार हैं। असुरराज का वध करने के बाद भी नरसिंह जी का क्रोध शांत नहीं हो रहा था।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक नरसिंह भगवान का उग्र रूप देखकर सभी देवता डर गए थे। तब भगवान शिव ने नरसिंह जी से भी ज्यादा शक्तिशाली शरभ अवतार लिया।

शरभ जी ने नरसिंह भगवान से शांत होने की प्रार्थना की, लेकिन वे शांत नहीं हुए। इसके बाद शरभ अवतार ने भगवान नृसिंह की स्तुति की, फिर भी नरसिंह जी का क्रोध शांत नहीं हुआ। तब शरभ जी ने नरसिंह जी को अपनी पूंछ में लपेट लिया और उड़ गए। इसके बाद दोनों देवताओं का युद्ध हुआ। जब नरसिंह जी शांत हुए तो उन्होंने शरभ अवतार से क्षमा मांगी।

ऐसा था शरभ अवतार का स्वरूप

शिव जी ने शरभ अवतार लिया था। इस अवतार में उनके शरीर का एक भाग शेर का था। दूसरा हिस्सा इंसान का और बाकी शरीर शरभ नाम के जीव का था। शरभ अवतार के आठ पैर, दो पंख, चोंच, एक हजार भुजाएं, माथे पर जटा और चंद्र थे। शरभ अवतार नरसिंह से बहुत अधिक शक्तिशाली और विशाल था।

नरसिंह प्रकट उत्सव पर ऐसे करें भगवान की पूजा

नरसिंह प्रकट उत्सव पर भगवान को हार-फूल चढ़ाने के साथ ही चंदन से लेप करना चाहिए। भगवान की मूर्ति पर चंदन का लेपन करें। धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें। इस दिन भगवान विष्णु के अन्य अवतारों की भी पूजा करनी चाहिए। श्रीराम और श्रीकृष्ण का अभिषेक भी जरूर करें। भगवान को तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं।