जन्माष्टमी पर लाखों भक्त पहुंचते हैं मथुरा-वृंदावन:मथुरा, वृंदावन क्षेत्र में बांके बिहारी और जन्मभूमि मंदिर के साथ ही ये 10 मंदिर भी हैं प्रसिद्ध

5 महीने पहले
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18 और 19 अगस्त को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस बार पंचांग भेद होने से अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग दिनों में ये पर्व मनाया जाएगा। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा लाखों भक्त पहुंचते हैं। मथुरा में मुख्य मंदिर जन्मभूमि है। इस मंदिर के अलावा गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन पर्वत, नंदगांव, बरसाना में भी श्रीकृष्ण के कई मंदिर हैं, जहां भक्त पहुंचते हैं। जानिए यहां 10 खास मंदिरों के बारे में...

श्रीकृष्ण जन्मभूमि

मथुरा में जन्मभूमि मंदिर के संबंध में मान्यता है इसी जगह पर कंस ने देवकी और वसुदेव जी को कारागृह में बंदी बनाकर रखा था। यहां के मंदिर में कारागृह का प्रतिकात्मक स्वरूप बना हुआ है और प्रथम तल पर भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर है। जन्माष्टमी पर यहां लाखों भक्त पहुंचते हैं।

द्वारकाधीश मंदिर

मथुरा में स्थित द्वारकाधीश मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। ये मंदिर 1814 में सेठ गोकुल दास पारीख ने बनवाया था। इस मंदिर के पास ही यमुना नदी का घाट है।

निधिवन, वृंदावन

श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए वृंदावन का पूरा गांव ही एक मंदिर की तरह है। वृंदावन में श्रीकृष्ण ने कई लीलाएं की थीं। यहां का निधिवन बहुत ही खास है। ऐसी मान्यता है कि इस वन में आज भी श्रीकृष्ण गोपियों संग रासलीला रचाते हैं। वृंदावन में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है।

प्रेम मंदिर

मथुरा-वृंदावन की यात्रा में प्रेम मंदिर भी काफी अधिक भक्त पहुंचते हैं। इस मंदिर का निर्माण 2001 में जगद्गुरु कृपालु जी महाराज द्वारा करवाया गया था। ये बहुत ही भव्य मंदिर है और अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। शाम को रंग-बिरंग रोशनी में मंदिर की सुंदरता और अधिक बढ़ जाती है।

बांके बिहारी मंदिर

श्रीकृष्ण के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है बांके बिहारी मंदिर। इस मंदिर के संबंध में मान्यता है कि यहां स्थापित श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्वभू है यानी स्वयं प्रकट हुई है। यहां जन्माष्टमी बहुत ही भव्य रूप में मनाई जाती है और देश-दुनिया से हजारों भक्त यहां पहुंचते हैं।

नंद महल, गोकुल

श्रीकृष्ण का बचपन गोकुल में ही बीता था। यहां का नंद महल प्रमुख मंदिर है। वसुदेव जी बाल कृष्ण को कंस के कारागृह से लेकर गोकुल पहुंचे थे। यहां वसुदेव जी ने कृष्ण को नंद बाबा और यशोदा जी के पास छोड़ा था। इसके बाद माता यशोदा ने कान्हा जी का पालन किया था।

रमन रेती

रमन रेती के संबंध में कहा जाता है कि इसी जगह पर श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ खेलते थे। इसी मान्यता की वजह से यहां आने वाले भक्त रमण रेती में खेलते हैं और खुद को धन्य समझते हैं।

गोवर्धन पर्वत

गोवर्धन पर्वत को श्रीकृष्ण ने पूजनीय बताया है। उस समय गोकुल के लोग इंद्रदेव की पूजा करते थे। श्रीकृष्ण ने गांव वालों से गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा था। जब लोगों ने इंद्रदेव की पूजा बंद कर दी इंद्र क्रोधित हो गए थे और उन्होंने पूरे क्षेत्र में भयंकर बारिश शुरू कर दी थी। बारिश से गांव के लोगों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने अपने हाथ की सबसे छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। तभी से गोवर्धन पर्वत की महिमा बढ़ गई। आज भी काफी लोग गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं, पूजा करते हैं।

यमुना जी का विश्राम घाट

मथुरा में द्वारकाधीश मंदिर के पास ही यमुना जी का विश्राम घाट है। यहां यमुना नदी में स्नान करने और पूजा-पाठ करने का महत्व काफी अधिक है। मान्यता है कि यमुना जी में स्नान करने से भक्तों के पाप धुल जाते हैं।

रंगनाथ जी का मंदिर

वृंदावन का रंगनाथ जी का मंदिर भी बहुत ही दर्शनीय है। क्षेत्रफल की दृष्टि से ये बहुत ही बड़ा मंदिर है। यहां ये मंदिर भगवान विष्णु के रंगनाथ स्वरूप को समर्पित है। मंदिर का निर्माण 1850 के आसपास हुआ था, इसे बनने में करीब 6 साल लगे थे।