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  • July 2021 Ashadh Amavasya Date Kab Hai; What To Do And What Not To Do, Kartik Amavasya History, Importance And Significance

आषाढ़ अमावस्या पर शुभ संयोग:मिथुन राशि में बन रहे भद्र और बुधादित्य योग में स्नान-दान से बढ़ेगी समृद्धि

3 महीने पहले
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  • आषाढ़ अमावस्या 9 और 10 को, इस पर्व पर तीर्थ में स्नान-दान से मिलता है कई यज्ञों का पुण्य

आषाढ़ महीने की अमावस्या शुक्र और शनिवार को मनाई जाएगी। ग्रह नक्षत्रों के अनुसार इस पर्व पर समृद्धि देने वाला धन योग रहेगा। इस दिन बन रहे 5 राजयोग धन लाभ के संकेत दे रहे हैं। इन दो दिनों की कुंडली में ग्रहों की स्थिति बहुत ही शुभ रहेगी। जिससे बन रहे शुभ योगों में किए गए स्नान-दान और पूजा-पाठ से भाग्य मजबूत होगा और सुख-समृद्धि भी बढ़ेगी।

ऐसे में ये शुक्रवार की अमावस्या बेहद ही सिद्धि दायक होगी। पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र ने बताया कि अमावस्या की शुरुआत भी इस दिन सूर्योदय से पहले ही हो जाएगी और पूरे दिन-रात रहेगी। फिर अगले दिन सूर्योदय के बाद अमावस्या तिथि खत्म होगी।

इसलिए खास हैं शुक्रवार की अमावस्या
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अमावस्या तिथि हर चंद्र मास में पड़ती है। अमावस्या को पर्व तिथि माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि पितृदेव अमावस्या तिथि के स्वामी हैं। इसलिए इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और दान-पुण्य का महत्व है।

ज्योतिषीयों के मुतबिक शुक्रवार को पड़ने वाली अमावस्या को भृगु अमावस्या भी कहा जाता है। इस अमावस्या पर शुक्र का असर ज्यादा रहता है। जिससे इस दिन किए गए दान से भौतिक सुख और समृद्धि भी बढ़ती है। इस पर्व पर खासतौर से पितरों की शांति के लिए पूजा करने का भी महत्व है।

पितृकर्म अमावस्या
डॉ. मिश्र ने बताया कि वैसे तो हर महीने अमावस्या तिथि पितृकर्म के लिए श्रेष्ठ होती है, लेकिन मान्यता है कि आषाढ़ की अमावस्या का खास महत्व है। आषाढ़ महीना पूजा-पाठ के लिहाज से भी विशेष है। इसकी वजह है कि ये महीना वर्षाकाल के प्रारंभ का समय होता है। इस माह पड़ने वाली अमावस्या को शुभ माना गया है। लोक मान्यता है कि आषाढ़ अमावस्या के दिन हमारे पितर अपने परिजनों से अन्न-जल ग्रहण करने आते हैं। पितरों की शांति के लिए नदी तट पर बड़े-बड़े यज्ञ अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। इसी कारण आषाढ़ अमावस्या को पितृकर्म अमावस्या के नाम से भी जाना गया है।

भृगु अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में नहाने के बाद जरूरतमंदों को दान देने से कई यज्ञ करने के समान पुण्य मिलता है। इस दिन पीपल की परिक्रमा कर, पीपल के पेड़ और भगवान विष्णु का पूजन करने से धन-समृद्धि में वृद्धि होती है। हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन आदि तीर्थस्थलों पर जाकर स्नानादि करने के साथ ही कुरुक्षेत्र के ब्रह्म सरोवर में डुबकी लगाने से भी पुण्य प्राप्ति होती है।

हलहारिणी अमावस्या
आषाढ़ महीने की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या भी कहा गया है। किसानों के लिए यह शुभ दिन है। उनके लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। किसान हल की पूजा करेंगे। कारण कि आषाढ़ मास में पड़ने वाली इस अमावस्या के समय तक वर्षा ऋतु का आरंभ हो जाता है। धरती भी नम पड़ जाती है। फसल की बुआई के लिए यह समय उत्तम है।

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