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व्रत और त्योहार का कैलेंडर:20 को गंगा दशहरा, 21 को निर्जला एकादशी और 24 को पूर्णिमा पर खत्म होगा ज्येष्ठ महीना

3 महीने पहले
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  • जून के चौथे हफ्ते में लगातार 5 दिन तक रहेंगे तीज-त्योहार, इसी हफ्ते होगी आषाढ़ महीने की शुरुआत

जून के चौथे हफ्ते की शुरुआत व्रत-त्योहारों से होगी। इसके शुरुआती पांच दिनों तक लगातार व्रत-त्योहार रहेंगे। इनमें सप्ताह के पहले ही दिन गंगा दशहरा फिर गायत्री जयंती, निर्जला एकादशी, प्रदोष और रूद्र व्रत किया जाता है। नारद पुराण में इसका जिक्र किया गया है। इसके बाद पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत किया जाएगा। पूर्णिमांत कैलेंडर मानने वालों के लिए ये ज्येष्ठ महीने का आखिरी दिन भी रहेगा। ग्रंथों में इस दिन स्नान-दान का बहुत महत्व बताया गया है। इसके अगले दिन से आषाढ़ महीने की शुरुआत हो जाएगी।

गंगा दशहरा: 20 जून रविवार
पुराणों के मुताबिक ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष के दसवें दिन यानी दशमी तिथि को धरती पर गंगा प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस पर्व पर ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति बनेगी। सूर्य और चंद्रमा मंगल की नक्षत्र में रहेंगे। चंद्रमा पर मंगल और गुरु की दृष्टि पड़ने से महलक्ष्मी और गजकेसरी राजयोग का फल भी मिलेगा। इसलिए ये पर्व खास रहेगा। इस दिन गायत्री जयंती भी रहेगी।

निर्जला एकादशी और गायत्री जयंती: 21 जून सोमवार
21 जून को गायत्री जयंती मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर उगते हुए सूरज को जल चढ़ाते वक्त गायत्री मंत्र बोलने से उम्र और जीवनी शक्ति भी बढ़ती है। साथ ही इस दिन निर्जला एकादशी एकादशी व्रत किया जाएगा। इस दिन बिना कुछ खाए और बिना पानी पिए व्रत किया जाता है। इस दिन मंदिरों में भगवान विष्णु की मूर्ति को चांदी या सोने की नाव में बैठाकर उन्हें नौका विहार भी करवाया जाता है। इस दिन जल से भरे मटके, पंखा, आम, खरबूजा, तरबूज या किसी भी मौसमी फल का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है।

प्रदोष व्रत: 22 जून, मंगलवार
ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि होने से इस दिन प्रदोष व्रत किया जा रहा है। मंगलवार होने से ये भौमप्रदोष रहेगा। मंगलवार को त्रयोदशी तिथि में भगवान शिव की पूजा करने से बीमारियां और हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं। शिव पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार प्रदोष व्रत हर तरह की मनोकामना पूरी करने वाला व्रत माना गया है।

रूद्र व्रत: 23 जून, बुधवार
ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर रूद्र व्रत किया जाता है। इसका जिक्र नारद पुराण में आता है। इस तिथि पर शाम को भगवान शिव के रूद्र रूप की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही सोने की गाय का दान करने का विधान बताया गया है। लेकिन ऐसा न हो पाए तो आटे में हल्दी मिलाकर उससे गाय बनानी चाहिए। उसकी प्राण-प्रतिष्ठा कर किसी मंदिर में उसका दान किया जा सकता है। ऐसा करने से सोने की गाय के दान जितना ही पुण्य मिलता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा, वट सावित्री व्रत: 24 जून, गुरुवार
पुराणों के मुताबिक ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को मन्वादि तिथि कहा गया है। यानी इस दिन किए गए तीर्थ स्नान और दान से मिलने वाला पुण्य कभी खत्म नहीं होता है। भविष्य और स्कंद पुराण के मुताबिक ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत किया जाता है। इस दिन बरगद के पेड़ के नीचे भगवान शिव-पार्वती के बाद सत्यवान और सावित्री की पूजा की जाती है। साथ ही यमराज को भी प्रणाम किया जाता है। अपने पति की लंबी उम्र के लिए शादीशुदा महिलाएं ये व्रत करती हैं।

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