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  • June 24 Is Also A Wednesday With Vinayak Chaturthi; This Is The First Coincidence Of The Year, After This This Yoga Will Be Made On 18 November

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व्रत-त्योहार:24 जून को विनायक चतुर्थी के साथ बुधवार भी है; ये साल का पहला संयोग, इसके बाद 18 नवंबर को बनेगा ये योग

8 महीने पहले
  • ग्रंथों के अनुसार चतुर्थी तिथि और बुधवार के स्वामी गणेशजी हैं, इस दिन व्रत और पूजा से पूरी होती हैं मनोकामनाएं

बुधवार, 24 जून को आषाढ़ महीने की विनायक चतुर्थी व्रत किया जाएगा। बुधवार होने से इस दिन व्रत और पूजा का महत्व और भी बढ़ गया है। क्योंकि चतुर्थी तिथि और इस दिन के स्वामी भगवान गणेश ही हैं। इसलिए इस संयोग में व्रत और गणेश जी की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ये साल का पहला संयोग है जब बुधवार के दिन विनायक चतुर्थी है। अब इसके बाद 18 नवंबर को ये योग बनेगा।

  • हिन्दू पंचांग के अनुसार बुधवार को सुबह करीब 10  बजे तक आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होने से इसी दिन भगवान गणेश के लिए व्रत रखा जाएगा और पूजा की जाएगी। चतुर्थी पर भगवान गणेश के व्रत करने की परंपरा इसलिए हैं क्योंकि इस तिथि के स्वामी गणेश जी ही हैं। गणेश पुराण के अनुसार इस दिन व्रत करने से सुख और समृद्धि बढ़ती है।

हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार हर महीने में दो बार चतुर्थी व्रत किया जाता है। हिन्दु धर्मग्रन्थों के अनुसार चतुर्थी भगवान गणेश की तिथि है। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्लपक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।

  • हालांकि विनायक चतुर्थी का व्रत हर महीने में होता है लेकिन भाद्रपद महीने में आने वाली विनायक चतुर्थी बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसे गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस पर्व को भारत सहित अन्य कुछ देशों में महागणेश चतुर्थी यानी गणेशजी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।

विनायक चतुर्थी पर सुबह जल्दी उठकर दिनभर व्रत रखने और गणेश पूजा करने का संकल्प लिया जाता है। इस व्रत के दौरान दोपहर में भगवान गणेश की पहली पूजा की जाती है। क्योंकि गणेश पुराण के अनुसार गणेशजी का जन्म दोपहर में हुआ था। दिनभर नियम से व्रत रखते हुए शाम को गणेशजी के साथ चतुर्थी देवी की भी पूजा की जाती है। इसके बाद चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य दिया जाता है। फिर चंद्रमा की पूजा करने के बाद परिवार सहित भोजन किया जाता है।

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