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  • Kaal Bhairav Festival On November 16: Eight Bhairavas Appeared In The Fierce Form Of Shiva; Kaal Bhairav Is The Third Among Them.

काल भैरव पर्व 16 नवंबर को:शिव के रौद्र रूप से प्रकट हुए थे आठ भैरव; उनमें तीसरे हैं काल भैरव, इनकी पूजा से दूर होती हैं परेशानियां

3 महीने पहले
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हिंदू कैलेंडर के अनुसार अगहन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव पूजा करने का विधान है। इसे काल भैरवाष्टमी के रूप में मनाते हैं। ये पर्व इस बार 18 नवंबर को रहेगा। काल भैरव का जिक्र पुराणों में मिलता है। शिव पुराण का कहना है कि कालभैरव भगवान शिव का रौद्र रूप है।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक कालभैरव श्रीकृष्ण के दाहिनी आंख से प्रकट हुए थे, जो आठ भैरवों में से एक थे। काल भैरव रोग, डर, संकट और दुख दूर करने वाले देवता हैं। इनकी पूजा से हर तरह की मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं।

पुराणों में बताए हैं 8 भैरव
स्कंद पुराण के अवंति खंड में लिखा है कि भगवान भैरव के 8 रूप हैं। इनमें से काल भैरव तीसरा है। शिव पुराण के अनुसार माना जाता है कि जब दिन और रात का मिलन होता है। यानी शाम को प्रदोष काल में शिव के रौद्र रूप से भैरव प्रकट हुए थे।

भैरव से ही बाकी 7 और प्रकट हुए जिन्हें अपने रूप और काम के हिसाब से नाम दिए हैं। उनके नाम, रुरु भैरव, संहार भैरव, काल भैरव, असित भैरव, क्रोध भैरव, भीषण भैरव, महा भैरव और खटवांग भैरव।

काल भैरव पूजा से दूर होती हैं तकलीफ
भैरव का अर्थ है भय को हरने या जीतने वाला। इसलिए काल भैरव रूप की पूजा से मृत्यु और हर तरह के संकट का डर दूर हो जाता है। नारद पुराण में बताया है कि काल भैरव की पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बीमारियां और तकलीफ भी दूर होती हैं। काल भैरव की पूजा पूरे देश में अलग-अलग नाम से और अलग तरह से की जाती है। कालभैरव भगवान शिव की प्रमुख गणों में एक हैं।

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