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कार्तिक मास:इस महीने महिलाओं के लिए तीज-त्योहार के 12 दिन; दीपदान, तुलसी पूजा और तीर्थ स्नान की परंपरा भी

एक महीने पहले
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  • तिथियों की घट-बढ़ को लेकर पंचांग भेद होने के बावजूद भी 30 दिनों का रहेगा महीना, ये शुभ संकेत

स्नान-दान और पर्व का महीना यानी कार्तिक मास 21 अक्टूबर से शुरू हो गया है। जो कि 19 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर्व के साथ खत्म होगा। तिथियों को लेकर पंचांग भेद होने के बावजूद ये महीना 30 दिनों का रहेगा। इस दौरान तीर्थों में स्नान और दान किया जाएगा। साथ ही भगवान विष्णु और देवी तुलसी की पूजा भी खासतौर से की जाएगी। श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि ये महीना मुझे बहुत प्रिय है। इस पूरे महीने दीपदान भी किया जाता है।

तिथियों की घट-बढ़ फिर भी शुभ
कार्तिक महीना 21 अक्टूबर से 19 नवंबर तक रहेगा। इस महीने कृष्णपक्ष की तेरहवीं और चौदहवीं तिथि को लेकर पंचांग भेद है। लेकिन, किसी तिथि का क्षय नहीं होने के कारण ये महीना 30 दिनों का रहेगा। ज्योतिषीयों का मानना है कि पूरे 30 दिन का महीना देश के लिए शुभ होता है। इस महीने पर्वों की तिथियों में भेद नहीं होने से ये महीना शुभ रहेगा। कार्तिक महीने में 5 गुरुवार होना और ग्रहों की शुभ स्थिति देश के आंतरिक रूप से मजबूत होने का संकेत दे रही है।

महिलाओं के लिए खास 12 दिन
24 अक्टूबर, रविवार को करवा चौथ के साथ खास तीज-त्योहारों की शुरुआत होगी। इनमें स्कंद षष्ठी, अहोई अष्टमी, रमा एकादशी, गोवत्स द्वादशी, भौम प्रदोष, रूप चतुर्दशी, सुहाग पड़वा, भाई दूज, छठ पूजा के तीन दिन और आंवला नवमी जैसे पर्वों पर महिलाएं पति की लंबी उम्र, संतान की सेहत और परिवार की समृद्धि की कामना से व्रत-उपवास करती हैं।

ब्रह्ममुहूर्त में स्नान का व्रत
कई महिलाएं कार्तिक महीने में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान के व्रत का संकल्प लेती हैं। इस में हर दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदियों, झीलों या तालाबों में नहाती है। इस व्रत में घर पर भी पवित्र नदियों का पानी मिलाकर नहा सकते हैं। ब्रह्मवैवर्त, स्कंद और विष्णुधर्मोत्तर पुराण में बताया गया है कि इस तरह स्नान करने से महिलाओं की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के साथ ही अखंड सौभाग्य और समृद्धि भी मिलती है। कार्तिक महीने के इस स्नान से जाने-अनजाने हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।

तुलसी पूजा का महत्व
कार्तिक महीने में तुलसी की पूजा का खास महत्व है। ये भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। इसलिए तुलसी की पूजा से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। इस महीने में स्नान के बाद देवी तुलसी और सूर्य को जल अर्पित किया जाता है। फिर पूजा की जाती है। इसके बाद तुलसी को प्रणाम करने के बाद पत्तों को तोड़कर पानी के साथ निगलने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से हर तरह के पाप दूर हो जाते हैं। वहीं, आयुर्वेद का मानना है कि इससे शरीर निरोग रहता है। तुलसी की पूजा से परिवार में सुख और शांति होती है साथ ही रोग और दुख भी दूर होते हैं।

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