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जीवन प्रबंधन:हरिशचंद्र और तारामति की सीख, वैवाहिक जीवन में जरूरी है प्रेम, त्याग और समर्पण की भावना

एक महीने पहले
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24 अक्टूबर को महिलाओं का महापर्व करवा चौथ है। ये पर्व वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए त्याग का महत्व बताता है। जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में प्रेम, त्याग, समर्पण, संतुष्टि और संस्कार जैसे पांच खास बातें हैं, उन्हें सुख-शांति जरूर मिलती है।

परिवार में सुख-शांति बनाए रखने के लिए पति-पत्नी को ये पांचों बातें अपनानी चाहिए। ये पांचों बातें राजा हरिशचंद्र और उनकी पत्नी तारामति से सीख सकते हैं। सतयुग के राजा हरिशचंद्र हमेशा सच बोलेत थे। सत्यव्रत में उनकी पत्नी तारामति भी पूरा सहयोग करती थीं। जानिए इनके वैवाहिक जीवन में ये पांच बातें कैसे काम रही थीं...

हरिश्चंद्र और तारामति के वैवाहिक जीवन का पहला आधार प्रेम था। हरिशचंद्र, तारामति से इतना प्रेम करते थे कि उन्होंने अन्य राजाओं की तरह दूसरा विवाह नहीं किया। तारामति के लिए पति ही सबकुछ थे, पति के कहने पर तारामति ने सारे सुख और राजमहल छोड़ दिया और एक दासी के रूप में रहने लगीं। ये उनके बीच समर्पण और त्याग की भावना थी।

दोनों के बीच कभी कोई वाद-विवाद नहीं हुआ। जीवन में जो मिला, उसे भाग्य समझकर स्वीकार किया और जीवन में संतुष्टी बनाए रखी। दोनों ने यही संस्कार अपने पुत्र राहुल को भी दिए। प्रेम, समर्पण, त्याग, संतुष्टि और संस्कार पांचों बातें उनके जीवन में थीं। इसी वजह से राज-पाठ खोने के बाद भी वे अपना धर्म निभाते रहे। राजा हरिशचंद्र ने अपने व्यवहार और सत्यव्रत से फिर से अपना राज-पाठ प्राप्त कर लिया था।

आज भी जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में ये पांच बातें होती हैं, उनके जीवन में कभी कोई परेशानी अधिक समय तक टिक नहीं पाती है।