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व्रत पर्व:रविवार को करवा चौथ, इस दिन चंद्र दर्शन और चौथ माता के पूजन की परंपरा

एक महीने पहले
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रविवार, 24 अक्टूबर को विवाहित महिलाओं का महा व्रत पर्व करवा चौथ है। इस दिन महिलाएं अपने पति के सुख, सौभाग्य, स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। शाम को चंद्र दर्शन और पूजन के बाद जल ग्रहण करती हैं। ये व्रत निर्जला होता है यानी इस दिन महिलाएं पानी भी नहीं पीती हैं। चतुर्थी पर चौथ माता की पूजा करने की परंपरा है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार करवा चौथ पर चौथ माता की पूजा और चंद्रोदय के बाद चंद्र को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद ही महिलाएं भोजन-पानी ग्रहण करती हैं। चौथ माता की पूजा में उनकी कथा पढ़ने और सुनने का महत्व काफी अधिक है। जानिए करवा चौथ की कथा...

प्रचलित कथा के अनुसार पुराने समय में इंद्रप्रस्थ क्षेत्र में वेद शर्मा नाम का एक ब्राह्मण था। उसकी पत्नी थी लीलावती। इनके सात बेटे और वीरावती नाम की एक बेटी थी। सातों भाइयों के बाद वीरावती की भी शादी हो गई। शादी के बाद जब कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी आई तो वीरावती ने भी अपनी भाभियों के साथ करवा चौथ का व्रत रखा, भूख-प्यास की वजह से वह चंद्रोदय के पहले ही बेहोश हो गई।

सातों भाई बहन की ऐसी हालत देखकर परेशान हो गए। इसके बाद भाइयों ने एक पेड़ के पीछे जलती मशाल का उजाला किया और बहन से कहा कि चंद्र उदय हो गया है। वीरावती ने भाइयों की बात मान ली और व्रत खोलकर भोजन कर लिया।

इसके कुछ समय बाद उसके पति की मृत्यु हो गई। पति की मृत्यु के बाद वीरावती ने अन्न-जल का त्याग कर दिया। उसी रात इंद्राणी पृथ्वी पर आईं। ब्राह्मण पुत्री ने पति की मृत्यु का कारण पूछा। इंद्राणी ने बताया कि तुमने अपने पिता के घर पर करवा चौथ का व्रत किया था, लेकिन वास्तविक चंद्र उदय के होने से पहले ही अर्घ्य देकर तुमने भोजन कर लिया था, इसी वजह से तुम्हारे पति की मृत्यु हुई है।

अब पति को फिर से जीवित करने के लिए विधिपूर्वक करवा चौथ का व्रत करो। व्रत के पुण्य प्रभाव से तुम्हारे पति को फिर से जीवन दान मिल सकता है।

वीरावती ने पूरे साल की चतुर्थी पर व्रत किया इसके बाद जब करवा चौथ आई तो उस दिन पूरे विधि-विधान से व्रत किया। इससे प्रसन्न होकर इंद्राणी ने उसके पति को जीवन दान दे दिया।

ये है करवा चौथ की संक्षिप्त कथा। मान्यता है कि इस कथा का पाठ करने से अक्षय पुण्य मिलता है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।