श्रीकृष्ण के रिश्तों से सीखें जीने का सलीका:पति-पत्नी में प्रेम अधिकार जताने से नहीं समर्पण से होता है, 8 कहानियों से सीखें 8 सूत्र

एक महीने पहलेलेखक: नितिन उपाध्याय

आज जन्माष्टमी है। आज ही भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया था। उनके जीवन का हर प्रसंग, हर कथा, हर बात आज भी हमारी जिंदगी के लिए उतने ही काम की है, जितनी महाभारत या उसके बाद के समय में रही होगी। कोरोना काल से गुजरी दुनिया ने पिछले दो सालों में रिश्तों के महत्व को बहुत गहराई से जाना है। परिवार और मित्र, जीवन के लिए कितने जरूरी हैं, ये हर उस आदमी को अच्छे से समझ आया, जिसने कोरोना की त्रासदी को नजदीक से देखा है।

श्रीकृष्ण का पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को लेकर अपना नजरिया था। जन्माष्टमी पर 8 कथाओं से भगवान कृष्ण से सीखें रिश्तों को संवारना, संभालना और निभाना।

द्वारकाधीश का विशेष श्रृंगार:सोने के तारों से बनी पोशाक; पन्ना, पुखराज और हीरे से सजा मुकुट; 50 कारीगरों ने 6 महीने में तैयार किया

स्कैच - गौतम चक्रवर्ती, मंसूर नकवी

ग्राफिक्स - हर्ष साहनी

खबरें और भी हैं...