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श्रीकृष्ण की युधिष्ठिर को सीख:सफलता के साथ ही प्रसन्नता और नई समस्याएं भी हमारे जीवन में आती हैं, हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए

10 दिन पहले
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जब हमें सफलता मिल जाती है तो हम बेफिक्र हो जाते हैं, लेकिन ये सही नहीं है, क्योंकि सफलता अपने साथ प्रसन्नता के साथ ही नई समस्याएं भी लेकर आती है। इसलिए हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।

ये बात महाभारत में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को समझाई थी। महाभारत युद्ध खत्म हो गया था, पांडवों ने कौरवों को हरा दिया था। दुर्योधन की भी मृत्यु हो गई थी। सारी बातें व्यवस्थित होने के बाद युधिष्ठिर को राजा बनाने की तैयारियां चल रही थीं।

श्रीकृष्ण लौटना चाहते थे द्वारका

पांडवों की तैयारियां देखकर श्रीकृष्ण ने विचार किया कि अब यहां मेरा काम खत्म हो गया है, इसलिए मुझे द्वारक लौटना चाहिए। श्रीकृष्ण ने अपनी इच्छा पांडवों को बताई तो वे सभी दुखी हो गए।

पांडव पुत्रों की माता कुंती श्रीकृष्ण को रोकना चाहती थीं, लेकिन भगवान ने उन्हें समझा दिया। इसके बाद वे अपने महल की ओर लौटने लगे तो युधिष्ठिर उनके साथ चल दिए।

युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि हमारी माता के साथ ही मैं भी यही चाहता हूं कि आप अभी न जाएं। अभी काफी समस्याएं और हैं, जिन्हें हल करना है।

श्रीकृष्ण बोले कि तुम राजा हो, अब कौन सी समस्याएं हैं?

कुटुंब के लोगों के मरने से युधिष्ठिर थे दुखी

युधिष्ठिर बोले कि ये सच है कि हम युद्ध जीत गए, लेकिन ये जीत अपने कुटुंब के लोगों को मारकर मिली है। अब ये दुख मुझे सता रहा है। मैंने नहीं सोचा था कि जीतने के बाद परिवार के लोगों की मृत्यु मुझे इतना सताएगी।

श्रीकृष्ण ने कहा कि हमें एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए। हर एक सफलता प्रसन्नता के साथ ही नई समस्याएं भी लेकर आती है। हर जीत के पीछे हार भी छिपी होती है। हमें वर्तमान में जीना चाहिए और भविष्य पर बेहतर बनाने के लिए अच्छे काम करना चाहिए। पिछले समय में घटी हुई घटनाओं का ध्यान करेंगे तो दुख ही मिलेगा। इसलिए तुम्हें भी बीती बातें भूल कर वर्तमान पर ध्यान लगाना चाहिए।

श्रीकृष्ण की बातें हमें भी ध्यान रखनी चाहिए। हमें भी वर्तमान में जीना चाहिए और बीती बुरी बातें भूल जाना चाहिए। तभी जीवन में सफलता के साथ ही सुख-शांति मिल सकती है।