शनिवार को माघ अमावस्या:शनि देव की पूजा के साथ ही नदी स्नान और तीर्थ दर्शन करने का शुभ योग; पितर देवता के लिए तर्पण जरूर करें

16 दिन पहले
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शनिवार, 21 जनवरी को माघ मास की (मौनी) अमावस्या है। जब शनिवार को अमावस्या होती है तो इसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन किसी नदी में स्नान करें। तीर्थ दर्शन और शनि देव की पूजा करें। मौनी अमावस्या पर दिनभर मौन रहकर पूजा-पाठ करने की परंपरा है। माघ मास में प्रयागराज में मेला लगता है, जिसमें काफी अधिक भक्त पहुंचते हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार माघ मास की अमावस्या पर पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और धूप-ध्यान करने की परंपरा है। शनिश्चरी अमावस्या पर दान-पुण्य जरूर करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को कंबल, जूते-चप्पल, कपड़े, काले तिल और अनाज का दान करना चाहिए। किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट करें।

ऐसे कर सकते हैं शनि देव की पूजा

शनि देव का सरसों के तेल से अभिषेक करना चाहिए यानी प्रतिमा पर तेल चढ़ाना चाहिए। इसके शनि देव को नीले वस्त्र अर्पित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जप करें। मंत्र जप कम से कम 108 बार करें। जरूरतमंद व्यक्ति को तेल और काले तिल का दान करें। शनि देव के मंदिर में दर्शन और पूजन करें।

माघ अमावस्या पर कर सकते हैं ये शुभ काम

माघ अमावस्या पर गंगा, यमुना, सरस्वती, शिप्रा, नर्मदा, गोदावरी, अलकनंदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। किसी पौराणिक महत्व वाले मंदिर में दर्शन करें। इस दिन किसी धाम, ज्योतिर्लिंग की या किसी अन्य तीर्थ की यात्रा कर सकते हैं।

हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें। आप चाहें तो ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं।

शिवलिंग पर दूध, जल चढ़ाएं। बिल्व पत्र, आंकड़े के फूल, धतूरा, जनेऊ, शहद आदि चीजें अर्पित करें। फूलों से श्रृंगार करें। मिठाई का भोग लगाएं। दीपक जलाकर आरती करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करते रहें।

भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक केसर मिश्रित दूध से करें। हार-फूल से श्रृंगार करें। मिठाई का भोग लगाएं, दीपक जलाएं। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।

घर में बाल गोपाल की प्रतिमा हो तो उनका भी अभिकेष करें। नए वस्त्र अर्पित करें। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।

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