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महाभारत की सीख:बात-बात पर गुस्सा करना आपका कई तरह से नुकसान करता है, ऐसी 5 चीजें हैं जो गुस्सा करने वाले लोग अक्सर खो देते हैं

2 महीने पहले
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  • भगवान कृष्ण से सीख सकते हैं कि बिना गुस्सा किए भी कैसे अपना काम सही तरीके से किया जा सकता है

क्या आप जानते हैं कि गुस्सा आपकी कितना व्यक्तिगत नुकसान करता है। कई लोगों का स्वभाव होता है बात बात पर आवेश में आ जाना। मर्यादाएं भूल जाना। किसी पर भी फूट पड़ना। ऐसे लोग अक्सर सिर्फ नुकसान ही उठाते हैं। खुद के स्वास्थ्य का भी, संबंधों का भी और छवि का भी। हमेशा ध्यान रखें अपनी छवि का।

लोग अक्सर अपनी छवि को लेकर लापरवाह होते हैं। हम जब भी परिवार में, समाज में होते हैं तो भूल जाते हैं कि हमारी इमेज क्या है और हम कैसा व्यवहार कर रहे हैं। निजी जीवन में तो और भी ज्यादा असावधान होते हैं। अच्छे-अच्छे लोगों का निजी जीवन संधाड़ मार रहा है।

सबसे पहले जो चीज खोते हैं वह है आपके संबंध। क्रोध की आग सबसे पहले संबंधों को जलाती है। पुश्तों से चले आ रहे रिश्ते भी क्षणिक क्रोध की बलि चढ़ते देखे गए हैं। कहने को लोग हमारे साथ दिखते हैं, लेकिन वास्तव में वे होते नहीं है। मन से रिश्ते टूट चुके होते हैं, सिर्फ औपचारिकता ही बचती है।

दूसरी चीज हमारे अपनों की हमारे प्रति निष्ठा। रिश्तों में दरार आए तो निष्ठा सबसे पहले दरकती है। लोग आपके प्रति उतने वफादार और गंभीर नहीं रह जाते, जितने वे पहले थे। ऐसे लोगों से जुड़ा व्यक्ति सिर्फ सही मौके के इंतजार में समय काटता है। जैसे ही कहीं और अवसर मिले, वो आपको छोड़कर चला जाता है।

तीसरी चीज है हमारा सम्मान। अगर आप बार बार किसी पर क्रोध करते हैं तो आप उसकी नजर में अपना सम्मान भी गंवाते जा रहे हैं। इसके बाद बारी आती है अपनी विश्वसनीयता की। हम पर से लोगों का विश्वास उठता जाता है। ये भी संभव है कि किसी पर बार-बार गुस्सा करना सामने वाले को विद्रोही बना दे।

चौथी चीज है स्वभाव। अगर बार-बार गुस्सा किया जाए। हर बात पर नाराजगी जताई जाए। सभी चीजों में नुक्स निकाले जाएं तो ये धीरे-धीरे हमारी आदत में शामिल हो जाता है। फिर वो हर जगह झलकने लगता है।

पांचवी चीज है स्वास्थ्य। गुस्सा हमें मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह से सेहत में नुकसान देता है। क्रोध की उत्तेजना हमें मानसिक रूप से बेचैन करती है, अस्थिर करती है, और ये अस्थिरता हमारे शारीरिक स्वास्थय पर असर डालती है। खाने से लेकर सोने तक पर इसका असर होता है। इंसान धीरे-धीरे कमजोर होता जाता है।

समाधान में चलते हैं। गुस्से की आदत को छोड़ना है तो कुछ चीजे अपने स्वभाव और व्यवहार में शामिल करने की कोशिश करें।

  • हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट रखें।
  • कोई भी बात हो, गहराई से उस पर सोचिए सिर्फ क्षणिक आवेग में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त ना करें।
  • सही समय का इंतजार करें।

कृष्ण से सीखिए अपने स्वभाव में कैसे रहें। उन्होंने कभी भी क्षणिक आवेग में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हमेशा परिस्थिति को गंभीरता से देखते थे। युधिष्ठिर की सभा में शिशुपाल उनका अपमान करता रहा लेकिन वे मुस्कुराते रहे। कोई तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं दी। सही वक्त का इंतजार करते रहे। शिशुपाल अपमान करता रहा, भीष्म, भीम और बलराम जैसे योद्धा गुस्सा होकर उसे मारने पर आमादा हो गए लेकिन कृष्ण सुनते रहे, मुस्कुराते रहे। जब सौ बार शिशुपाल ने उनका अपमान कर दिया। खुद थक गया। तब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया लेकिन कहीं भी अपने चेहरे पर क्रोध नहीं आने दिया।

अपनी दिनचर्या में मेडिटेशन को और चेहरे पर मुस्कुराहट को स्थान दें। ये दोनों चीजें आपके व्यक्तित्व में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। कभी भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आपको तैयार रखेगी।

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