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  • Mahalakshmi Vrat Ashtami Tithi Today, Women Will Perform Tarpan From Durva 16 Times For The Long Life Of Their Children.

महालक्ष्मी व्रत:अष्टमी तिथि आज, संतान की लंबी उम्र की कामना से 16 बार दूर्वा से तर्पण करेंगी महिलाएं

एक महीने पहले
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  • आज घरों में होगी मिट्टी के हाथी की पूजा, पकवानों से बने आभूषणों से किया जाएगा देवी महालक्ष्मी का शृंगार

आश्विन महीने के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर पुत्र की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत किया जाएगा। इस दिन हाथी पूजा के साथ ही महालक्ष्मी पूजन भी होगा। साथ ही इस तिथि में 16 बार दूर्वा से तर्पण करने का भी विधान बताया गया है। इस बार 29 सितंबर बुधवार को पार्थिव हाथी के साथ महालक्ष्मी पूजन और तर्पण किया जाएगा। पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र ने बताया कि बुधवार को घर-घर में श्री महालक्ष्मी पूजन होगा। इस मौके पर पकवानों से बने आभूषणों से श्रीमहालक्ष्मी जी का श्रृंगार किया जाएगा। शास्त्रों के मुताबिक इस व्रत में प्रदोष काल के वक्त की गई पूजा को शुभ बताया गया है। ये व्रत अपने पुत्र, पौत्रों की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना से महिलाओं को खासतौर से सुहागिनों को इस व्रत को जरूर अवश्य करना चाहिए।

16 दिन के व्रत का आज आखिरी दिन
घर-परिवार की आर्थिक हालत ठीक करने, सुख-समृद्धि के साथ ही परिवार की रक्षा के लिए भाद्रपद महीने के शुक्लपक्ष की अष्टमी से आश्विन महीने के कृष्णपक्ष की अष्टमी तक महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इस व्रत के आखिरी दिन हवन कर ब्राह्मणों को भोजन करवाया जाता है। इस बार ये व्रत 14 से 29 सितंबर तक किया जा रहा है। यानी आज इस व्रत का आखिरी दिन है। इस व्रत से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

शास्त्रों में कहा गया है कि
प्रदोष काले स्त्रीभिः पूज्यो जीमूतवाहनः।
सप्तम्यामुदिते सूर्ये परम अष्टमी भवेत्।
तत्र व्रतोत्सवं कुयार्न्न कुयार्दपरेsहनि।
अर्थ: जिस दिन प्रदोषकाल के वक्त अष्टमी तिथि हो उसी दिन ये व्रत करना चाहिए। अगर सप्तमी के बाद अष्टमी हो तो लक्ष्मी पूजा के लिए बहुत शुभ मानी गई है।

धागे में सोलहवी गांठ लगाने का विधान
इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं किसी जलाशय में जाकर सोलह बार दूर्वा से तर्पण करती हैं और प्रदोष काल में हाथी सहित महालक्ष्मी का पूजन करती हैं। ये व्रत भाद्रपद शुक्लपक्ष की अष्टमी से शुरू हो जाता है और सौलह तार वाले धागे में हर दिन एक गांठ लगाई जाती है। आश्विन महीने के कृष्णपक्ष की अष्टमी को इस धागे में सोलहवी गांठ लगाने का विधान है।

इस व्रत में सोलह का महत्व
महालक्ष्मी व्रत में सोलह का विशेष महत्व है। यानी सोलह गांठ, सोलह बार मुंह धोना, सोलह बार तर्पण, सोलह दीपक, सोलह बोल की कहानी, सोलह श्रंगार, सोलह दिन का व्रत, सोलह दूर्वा, सोलह डुबकी लगाने का विधान है। अष्टमी तिथि पर यानी 29 सितंबर को प्रदोष काल में हाथी और महालक्ष्मी की पूजा की जाएगी।

ये है पूजन का विधान
सुबह किसी तालाब या नदी में जाकर दूर्वा से तर्पण करके प्रदोष काल यानी शाम में पूर्व दिशा की ओर एक पटा पर हाथी सहित महालक्ष्मी जी को बैठाकर पकवानों के साथ रोली, चावल, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, फूल से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद कथा भी पढ़ें। हाथी और महालक्ष्मी जी को गंगाजल का आचमन करवाएं। पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि यह व्रत सप्तमी युक्त अष्टमी में प्रदोष के समय किया जाता है।

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