तीज-त्योहार / महेश नवमी 31 मई को, इस दिन शिवजी की पूजा और व्रत से दूर होते हैं पाप

Mahesh Navami /Teej Tyohar (Festival) 2020; Mahesh Navam Puja Vrat Vidhi Importance (Mahatva) and Significance
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Mahesh Navami /Teej Tyohar (Festival) 2020; Mahesh Navam Puja Vrat Vidhi Importance (Mahatva) and Significance

  • हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की नवमी को की जाती है भगवान शिव-पार्वती की विशेष पूजा

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 06:39 PM IST

ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन को महेश नवमी पर्व के रुप में मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन ही माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए माहेश्वरी समाज द्वारा यह पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। महेश नवमी के दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करने का भी विधान है। ज्येष्ठ महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से हर तरह के पाप दूर हो जाते हैं।

पूजन विधि

  1. इस दिन सुबह जल्दी उठकर नहाएं और व्रत का संकल्प लें।
  2. उत्तर दिशा की ओर मुंहकर के भगवान शिव की पूजा करें।
  3. गंध, फूल और बिल्वपत्र से भगवान शिव-पार्वती की पूजा करें।
  4. दूध और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  5. शिवलिंग पर बिल्वपत्र, धतूरा, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं।


इस प्रकार महेश नवमी के दिन भगवान शिव का पूजन करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।

इसलिए मनाते हैं महेश नवमी
महेश नवमी पर खासतौर से माहेश्वरी समाज द्वारा मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार माहेश्वरी समाज के पूर्वज क्षत्रिय वंश के थे। किसी कारण से उन्हें ऋषियों ने श्राप दे दिया। तब इसी दिन भगवान शंकर ने उन्हें श्राप से मुक्त किया व अपना नाम भी दिया। यह भी प्रचलित है कि भगवान शंकर की आज्ञा से ही इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य या व्यापारिक कार्य को अपनाया।

  • वैसे तो महेश नवमी का पर्व सभी समाज के लोग मनाते हैं, लेकिन माहेश्वरी समाज द्वारा इस पर्व को बहुत ही भव्य रूप में मनाया जाता है। इस उत्सव की तैयारी पहले से ही शुरू हो जाती है। इस दिन धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाते हैं। कुछ स्थानों पर चल समारोह भी निकाले जाते हैं। यह पर्व भगवान शंकर और पार्वती के प्रति पूर्ण भक्ति और आस्था प्रकट करता है।

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