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मंत्र जाप के फायदे:नवरात्रि में देवी दुर्गा के मंत्रों का जाप करने से बढ़ती है सकारात्मकता और दूर होते हैं नकारात्मक विचार

2 महीने पहले
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  • दो ऋतुओं के संधिकाल में आती है नवरात्रि, इन दिनों में व्रत-उपवास और ध्यान करने से स्वास्थ्य को मिलता है लाभ

अभी अश्विन मास की नवरात्रि चल रही है। ये वर्षा ऋतु के जाने का और शीत ऋतु के आने का समय है। इसे ऋतुओं का संधिकाल कहा जाता है। इन दिनों में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए जीवन शैली में कुछ जरूरी बदलाव करना चाहिए। ऋतु परिवर्तन के समय में स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए ध्यान करने का विशेष महत्व है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार नवरात्रि में ध्यान और पूजा-पाठ करने से पुण्य में बढ़ोतरी होती है, साथी ही ये हमारे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।

नवरात्रि में रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद घर के मंदिर में मंत्र जाप और ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मकता बढ़ती है और बुरे विचार दूर होते हैं। सुबह-सुबह किए गए ध्यान की वजह से दिनभर के कामों में ऊर्जा और उत्साह बना रहता है। आलस दूर रहता है। ध्यान करने से शरीर को स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।

मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। देवी पूजा करते समय में देवी मंत्र दुं दुर्गायै नम: मंत्र का जाप किया जा सकता है। मंत्र जाप रुद्राक्ष की माला की मदद से करना चाहिए। पूजा करने वाले भक्त को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जाप के लिए किसी ऐसी जगह का चयन करें, जहां शांति और पवित्रता हो। एकाग्र मन से किए गए जाप से सकारात्मक फल मिलते हैं।

देवी दुर्गा के अन्य मंत्र

सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्येत्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोस्तु ते।।

अर्थ - गौरी, नारायणी भक्तों का सर्व मंगल करने वाली हैं। आप शिवा हैं, सभी कामों को सिद्धि करने वाली हैं। शरण में भक्तों को कल्याण करने वाली हैं। देवी मा तीन नेत्रों वाली हैं। आपको मेरा नमस्कार है।

ऊँ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

अर्थ- जयंती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवाधात्री और स्वधा, देवी मां को इन नामों से जाना जाता है। देवी मां के सभी स्वरूपों को मेरा नमस्कार है।

अगर हम चाहें तो दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं। देवी कथाएं भी पढ़ सकते हैं। देवी मां के सामने धूप-दीप जलाएं, हार-फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद देवी मां की मूर्ति के सामने या देवी के चित्र के सामने आसन पर बैठकर मंत्र जाप किया जा सकता है।

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