व्रत-उपवास:सावन सोमवार और एकादशी का योग 8 अगस्त को; शिव जी के साथ ही भगवान विष्णु के मंत्रों का करें जप

5 दिन पहले
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सोमवार, 8 अगस्त को सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, इसे पुत्रदा एकादशी कहते हैं। शिव जी के भक्तों के लिए सावन महीने का महत्व काफी अधिक है। खासतौर पर इस महीने के सोमवार को शिव जी की विशेष पूजा करने की परंपरा है। एकादशी और सोमवार के योग में शिव जी के साथ ही विष्णु जी की पूजा और मंत्रों का जप जरूर करना चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक पुत्रदा एकादशी के व्रत से भक्तों को संतान संबंधी परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है। इस व्रत के पुण्य से संतान के जीवन की बाधाएं दूर हो सकती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, का जप करते हुए पूजन करना चाहिए।

ऐसे कर सकते हैं विष्णु जी की पूजा

भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। अभिषेक के लिए केसर मिश्रित दूध का उपयोग करना ज्यादा शुभ रहता है। दूध से अभिषेक के बाद जल से अभिषेक करना चाहिए। भगवान को नए वस्त्र अर्पित करें। फूलों से भगवान का सुंदर श्रृंगार करें। भगवान को पूजन सामग्री चढ़ाएं। मिठाई का भोग तुलसी के पत्तों के साथ लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। मंत्र जप करें।

शिव पूजा में चढ़ाएं बिल्व पत्र के साथ शमी के पत्ते

शिव पूजा में आमतौर पर बिल्व पत्रों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इनके साथ ही शमी के पत्ते भी भगवान को चढ़ाना चाहिए। शमी के पत्ते शिव जी, गणेश जी और शनि देव को चढ़ाए जाते हैं। इनके साथ ही आंकड़े के फूल, गुलाब, धतूरा, जनेऊ, चावल आदि चीजें चढ़ाएं। चंदन का तिलक लगाएं। शिवलिंग को फूलों से सजाएं। मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

एकादशी व्रत से जुड़ी मान्यताएं

स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में सालभर की सभी एकादशियों का महत्व बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी व्रत और इससे मिलने वाले लाभों की जानकारी दी थी। ये व्रत मूलरूप से भगवान विष्णु के लिए किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो लोग सभी एकादशियों पर व्रत करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य लाभ के साथ ही धर्म लाभ भी मिलते हैं। आयुर्वेद में बताया गया है कि व्रत करने से हम अन्न का त्याग करते हैं और फलों का सेवन करते हैं, जिससे हमारे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और पेट संबंधी कई बीमारियों की रोकथाम होती है।