रामायण की सीख:समय एक जैसा नहीं रहता; एक पल भी बर्बाद नहीं करना चाहिए, वरना लक्ष्य से भटक जाते हैं

6 महीने पहले
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  • राम नवमी पर जानिए रामायण के कुछ ऐसे सूत्र, जिन्हें अपनाने से जीवन में सुख-शांति मिल सकती है

आज बुधवार, 21 अप्रैल को राम नवमी है। त्रेतायुग में इसी तिथि पर भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। रामायण में कई ऐसे सूत्र बताए गए हैं, जिन्हें जीवन में उतार लेने से हमारी सभी समस्याएं, सभी दुख दूर हो सकते हैं। यहां जानिए रामायण की ऐसी खास बातें, जो जीवनभर हमारे काम आ सकती हैं...

समय एक जैसा नहीं रहता है। सुख-दुख का आना-जाना लगा रहता है। हमें हर परिस्थिति में सकारात्मक ही रहना चाहिए। श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां हो रही थीं, लेकिन उन्हें 14 वर्ष के लिए वनवास पर जाना पड़ गया। वनवास जाते समय भी श्रीराम दुखी नहीं थे, उन्होंने इसे भी प्रसन्नता के साथ ही अपनाया था।

श्रीराम ने बालि को मारा सुग्रीव को राजा बनाकर अपना वचन पूरा किया, लेकिन सुग्रीव सीता की खोज में मदद करने का वचन भूल गए थे। जब लक्ष्मण ने क्रोध किया, तब सुग्रीव को अपनी गलती का अहसास हुआ।

हनुमानजी को समुद्र पार करके लंका पहुंचकर सीता की खोज करनी थी। जब वे समुद्र पार कर रहे थे तब रास्ते में मैनाक पर्वत ने हनुमानजी से कहा था कि कुछ देर विश्राम कर लो, लेकिन हनुमानजी इस प्रलोभन में नहीं फंसे और वहां नहीं रुके। इसके बाद सुरसा ने उनका रास्ता रोका, लेकिन हनुमानजी ने सुरसा से भी युद्ध करने में समय बर्बाद नहीं किया। सुरसा का सामना बुद्धिमानी से किया और आगे बढ़ गए।

मंथरा ने कैकयी को अपनी बातों में फंसा लिया था। कैकयी को श्रीराम से बहुत स्नेह था, लेकिन मंथरा ने कैकयी की बुद्धि भ्रमित कर दी थी। इसी वजह से कैकयी ने श्रीराम को वनवास और भरत को राज्य देने के दो वर राजा दशरथ से मांग लिए।

अपने बल पर, धन पर, अपनी योग्यता पर घमंड न करें। रावण को अपनी शक्तियों पर बहुत घमंड था। इसी वजह से उसने श्रीराम को सामान्य शत्रु की तरह समझा और इस घमंड के कारण उसके पूरे वंश का ही नाश हो गया।