नाग पंचमी 2 अगस्त को:राजा परीक्षित को डंसा था तक्षक नाग ने, इसके बाद जनमेजय ने नागों को खत्म करने के लिए किया था नाग दाह यज्ञ

8 दिन पहले
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मंगलवार, 2 अगस्त को नाग पंचमी है। इस तिथि पर शिव जी के साथ ही नाग देव की पूजा की जाती है। ये पर्व सांपों को समर्पित है। शास्त्रों में नागों के बारे में भी कई कथाएं बताई हैं। एक कथा राजा परिक्षित से जुड़ी है।

महाभारत में अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित को जब ये मालूम हुआ कि अगले सात दिन के बाद उसकी मृत्यु तक्षक नाग के डंसने से होगी, तब परीक्षित ने इन सात दिनों में शुकदेव जी से श्रीमद् भागवत कथा सुनी थी। सातवें दिन तक्षक सांप के डंसने पर परीक्षित की मृत्यु हुई। परीक्षित के बाद उसका पुत्र जनमेजय राजा बना।

राजा जनमेजय को जब ये मालूम हुआ कि उसके पिता परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हुई थी तो वह बहुत गुस्सा हो गया। जनमेजय ने नागों से बदला लेने के लिए नाग दाह यज्ञ शुरू करवाया।

यज्ञ शुरू होने के बाद पूरी धरती से सांप आकर यज्ञ कुंड में गिरने लगे। ऋषि-मुनि नागों के नाम ले-लेकर आहुति दे रहे थे और सांप कुंड में गिरते जा रहे थे। इस यज्ञ से डरकर तक्षक नाग देवराज इंद्र के पास जाकर छिप गया था।

उस समय आस्तिक मुनि को यज्ञ के बारे में मालूम हुआ तो वे यज्ञ स्थल पहुंच गए। जनमेजय सभी मुनियों का बहुत सम्मान करता था, उसने आस्तिक मुनि को प्रणाम किया। आस्तिक जी ने राजा को नाग दाह यज्ञ बंद करने के लिए समझाया तो जनमेजय ने यज्ञ रोक दिया और नाग पूरी तरह से नष्ट होने से बच गए।

पूजा में हल्दी नाग देव को हल्दी भी जरूर चढ़ाएं

नाग पंचमी पर सबसे पहले गणेश पूजन करना चाहिए। गणेश पूजा के बाद शिव जी, देवी पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत चढ़ाएं। बिल्व पत्र, आंकड़े के फूल, धतूरा, गुलाब आदि चीजें चढ़ाएं। चंदन से तिलक करें। शिव जी के साथ ही नाग देव की पूजा भी करें। नाग देव को हार, फूल-प्रसाद, चंदन आदि चीजों के साथ ही हल्दी भी जरूर चढ़ानी चाहिए। धूप-दीप जलाकर शिव जी और नाग देव की आरती करें।

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