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विष्णु जी का चौथा अवतार:नरसिंह जी की वजह से राजा के आसन का नाम पड़ा सिंहासन, भगवान को चंदन और पंचामृत चढ़ाकर करें पूजा

12 दिन पहले
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शनिवार, 14 मई को भगवान विष्णु के चौथे अवतार नरसिंह जी का प्रकटउत्सव है। नरसिंह जी वैशाख माह के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर प्रकट हुए थे। इस अवतार के संबंध में भक्त प्रहलाद और उसके पिता हिरण्यकश्यपु की कथा प्रचलित है। नरसिंह जयंती रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी।

असुरों के राजा हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रहलाद विष्णु जी का भक्त था। इस वजह से असुरराज उसे मारना चाहता था। जब हिरण्यकश्यपु का आतंक बहुत ज्यादा बढ़ गया, तब प्रहलाद को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने एक खंबे से नरसिंह अवतार लिया था।

ज्योतिषाचार्य पं. निलेश शास्त्री के मुताबिक भगवान नरसिंह का आधा शरीर सिंह यानी शेर का और आधा शरीर इंसान का था। भगवान विष्णु सौम्य स्वभाव के हैं, लेकिन उनके चौथे अवतार नरसिंह जी बहुत क्रोधी स्वभाव वाले हैं।

राजा के आसन को क्यों कहते हैं सिंहासन

ऐसा माना जाता है कि राजा के आसान को सिंहासन भगवान नरसिंह की वजह से ही कहा जाता है। जब नरसिंह जी ने हिरण्यकश्यपु का वध किया तो वे जिस आसन पर बैठे थे, उसे सिंहासन कहा गया। बाद में उसी सिंहासन पर बैठाकर प्रहलाद का राजतिलक नरसिंह ने किया था। तब से ही राजा के आसन को सिंहासन कहा जाने लगा।

ऐसे करें नरसिंह जी का पूजन

नरसिंह जयंती पर भगवान नरसिंह को पंचामृत और चंदन खासतौर पर चढ़ाएं। पंचामृत दूध, दही, घी, शकर और शहद मिलाकर बनाया जाता है। नरसिंह जी उग्र स्वभाव के देवता हैं, इसलिए उन्हें शीतलता देने वाली चीजें चढ़ानी चाहिए। भगवान की प्रतिमा पर चंदन का लेप करें। फूल चढ़ाएं। भगवान नरसिंह के सहस्रनाम का पाठ करें। आप चाहें तो भगवान नृसिंह के प्रचलित दस नामों का भी जप कर सकते हैं। ये दस नाम हैं- उग्र नरसिंह, क्रोध नरसिंह, मलोल नरसिंह, ज्वल नरसिंह, वराह नरसिंह, भार्गव नरसिंह, करंज नरसिंह, योग नरसिंह, लक्ष्मी नरसिंह, छत्रावतार नरसिंह, पावन नरसिंह, पमुलेत्रि नरसिंह।