देवी दुर्गा के शस्त्रों में त्रिशूल और सुदर्शन चक्र भी:देवताओं ने अपने शस्त्र देवी को दिए, ये हथियार भी सिखाते हैं जिंदगी में सफल होना

2 महीने पहलेलेखक: नितिन उपाध्याय

नवरात्रि शुरू हो गई है। ये शक्ति की आराधना का पर्व है। पौराणिक कथा है कि महिषासुर नाम के राक्षस को जब सारे देवता भी मिलकर हरा नहीं पा रहे थे तब सबने ब्रह्माजी के कहने पर अपने-अपने तेज से एक शक्ति प्रकट की। ये शक्ति थीं देवी दुर्गा। सारे देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र भी दिए। इन शस्त्रों से देवी दुर्गा ने महिषासुर को मारा।

ये शक्ति के प्रकट होने की छोटी सी कहानी थी। लेकिन, इसके पीछे का मैसेज छोटा नहीं है। ये भले ही पौराणिक काल की कथा है, ज्यादातर लोग इसे मायथोलॉजी भी कहते हैं। मगर, इस कहानी के पीछे वो संदेश है जो आधुनिक जीवन में सबसे ज्यादा काम आ सकता है।

कुछ विद्वानों का मत है महिषासुर हमारे मन का प्रतीक है, मन अनियंत्रित हो जाए तो सबकुछ बिगड़ जाता है। इसे कंट्रोल करने में ही सबसे ज्यादा ताकत लगती है। महिषासुर का अत्याचार, देवताओं की शक्ति से दुर्गा का प्रकट होना और उन्हें देवताओं के शस्त्र मिलना। इसके पीछे बहुत गहरे संकेत हैं।

तो, आज इस कहानी के जरिए हम समझते हैं कि देवी दुर्गा के हथियार क्या हैं, किसने दिए और आज इनका क्या उपयोग है।

स्कैच - गौतम चक्रवर्ती

ग्राफिक्स - हर्ष साहनी

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