नवरात्रि में स्ट्रेस हो सकता है दूर:मेडिटेशन करने के लिए सबसे अच्छे हैं नवरात्रि के दिन, भक्ति के साथ ही मन को किया जा सकता है शांत

5 दिन पहले
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सोमवार, 26 सितंबर से देवी दुर्गा का नौ दिवसीय महापर्व नवरात्रि शुरू हो रहा है। इन दिनों में देवी मां के नौ रूपों की पूजा के साथ ही जप और ध्यान करने की भी परंपरा है। देवी मंत्रों के साथ किए गए ध्यान से भक्ति हो जाती है, बुरे विचार खत्म होते हैं और मन को शांति मिलती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक नवरात्रि का समय हमारे स्वास्थ्य के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण होता है। ये दो ऋतुओं के बीच का समय होता है। बारिश खत्म हो रही है और शीत ऋतु शुरू हो रही है। इन दो ऋतुओं के बीच में यानी संधिकाल में शारदीय नवरात्रि आती है। पं. शर्मा से जानिए नवरात्रि से जुड़े कुछ खास सवालों के जवाब...

नवरात्रि में व्रत-उपवास से क्या लाभ मिलता है?

अभी ऋतुओं के संधिकाल का समय है। इन दिनों में मौसमी बीमारियां होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। न चाहते हुए भी खान-पान की लापरवाही हो जाती है। मौसम में तेजी से परिवर्तन होता है, हमारा शरीर उस तेजी से खुद को ढाल नहीं पाता है और सर्दी-जुकाम, मानसिक तनाव, दर्द, अपच, गैस, एसिडिटी जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में किए गए व्रत-उपवास और ध्यान से हमारी इन्युनिटी बढ़ती है और शरीर इन बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है।

तनाव से बचना चाहते हैं तो रोज करें ध्यान

घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में देवी मां की पूजा विधिवत करें। पूजन के बाद आसन बिछाकर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं।

मन शांत करें और आंखें बंद करें। इसके बाद अपना पूरा ध्यान दोनों आंखों के बीच आज्ञा चक्र पर लगाएं।

ध्यान करते समय सांस लेने की और छोड़ने की गति सामन्य रखनी चाहिए। इस तरह ध्यान करना चाहिए। शुरू-शुरू में मन में विचारों का प्रवाह बना रहता है, लेकिन कुछ समय बाद ध्यान करते समय मन में विचार नहीं रहते हैं।

इस तरह मेडिटेशन करने से मन एकाग्र होने लगता है और अशांति दूर होती है।