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देवी दुर्गा की साधना का महापर्व:नवरात्रि 26 सितंबर से 4 अक्टूबर तक, देवी मां की पूजा के लिए सबसे अच्छा समय है सुबह का

7 दिन पहले
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'शारदीय नवरात्रि यानी आश्विन माह की नवरात्रि 26 सितंबर से शुरू हो रही है। देवी दुर्गा की पूजा का नौ दिवसीय महापर्व 4 अक्टूबर तक रहेगा। इन दिनों में देवी मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। देवी पूजन के लिए सुबह-सुबह का समय अच्छा रहता है। महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की पूजा इन नौ दिनों में करने से भक्त की सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं।'

ये कहना है उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा का। पं. शर्मा आगे कहते हैं, 'नौ दिन तक माता दुर्गा की आराधना करने का ये पर्व सुख-समृद्धि देने वाला होता है। इस बार नवरात्रि नौ दिनों की ही रहेगी।'

वार के अनुसार तय होता है देवी मां का वाहन

नवरात्रि की शुरुआत सोमवार से हो रही है, इस वजह से देवी मां हाथी पर बैठकर आएंगी। यह देश-दुनिया के लिए शुभ रहेगा। नवरात्रि की शुरुआत जिस वार से होती है, उसके अनुसार देवी मां का वाहन रहता है। देवी भागवत के मुताबिक जब नवरात्रि सोमवार या रविवार से शुरू होती है तो देवी का वाहन हाथी रहता है। शनिवार या मंगलवार से नवरात्रि शुरू हो तो वाहन घोड़ा रहता है। गुरुवार या शुक्रवार से नवरात्रि शुरू हो तो देवी मां डोली में सवार होकर आती हैं। जब बुधवार से नवरात्रि शुरू होती है तो मातेश्वरी का वाहन नाव होता है।

एक साल में चार बार आती हैं नवरात्रियां

एक हिन्दी वर्ष में 4 बार नवरात्रियां आती हैं। दो नवरात्रियां गुप्त रहती हैं और दो सामान्य रहती हैं। माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त मानी जाती है। आश्विन मास और चैत्र मास में आने वाली नवरात्रि सामान्य रहती हैं। गुप्त नवरात्रि में गुप्त साधनाएं की जाती हैं। सामान्य नवरात्रि में सामान्य भक्त देवी मां की पूजा सामान्य विधि से करते हैं।

ऋतुओं के संधिकाल में आती है नवरात्रि

अभी वर्षा ऋतु खत्म हो रही है और शीत ऋतु की शुरुआत होती। ये समय दो ऋतुओं का संधिकाल है। ऐसे ही समय में नवरात्रि आती है। इन दिनों में किए गए व्रत-उपवास और पालन किए गए नियम-संयम से स्वास्थ्य लाभ के साथ ही धर्म लाभ भी मिलते हैं। ऋतुओं के संधिकाल में मौसमी बीमारियां होने की संभावनाएं रहती हैं। ऐसे समय में खान-पान में सावधानी रखी जाए और नियम-संयम से रहा जाए तो हम ऐसी बीमारियों से बच सकते हैं।