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दुर्गाष्टमी 20 को:देवी महापूजा के लिए 3 मुहूर्त, अभी कन्या पूजा न कर सकें तो बाद में करने का संकल्प लें

3 महीने पहले
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  • महामारी के चलते अष्टमी पर कन्या पूजा संकल्प लेने से भी मिलेगा देवी आराधना का पूरा फल

नवरात्रि के आठवें दिन यानी अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा की विशेष पूजा का विधान है। इस बार ये 20 अप्रैल, मंगलवार को है। साथ ही ये दिन देवी मां महागौरी का है। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी विशेष दिन होते हैं। इन दिनों में कन्या भोजन और देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा और हवन करवाए जाते हैं। मार्कंडेय पुराण में अष्टमी तिथि को देवी पूजा का महत्व बताया गया है। जिसके मुताबिक अष्टमी पर देवी पूजा करने से हर तरह की परेशानी दूर हो जाती है और घर में कभी दरिद्रता भी नहीं आती।

इस बार कन्या पूजन न भी कर पाएं तो नहीं लगेगा दोष
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि इस बार महामारी को देखते हुए कन्या पूजन न भी कर पाएं तो इसका दोष नहीं लगेगा। अष्टमी पर कन्या पूजन का संकल्प लेकर आने वाले किसी भी महीने में शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि पर कन्या का पूजन कर भोजन करवाया जाए तो देवी प्रसन्न होंगी। साथ ही इस अष्टमी पर किसी जरूरतमंद को खाना खिलाया जा सकता है।

अष्टमी पूजा का महत्व
अष्टमी तिथि पर अनेक प्रकार के मंत्रो और विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। इस दिन मां दुर्गा से सुख, समृद्धि, यश, कीर्ति, विजय, आरोग्यता की कामना करनी चाहिए। मां दुर्गा का पूजन अष्टमी व नवमी को करने से कष्ट और हर तरह के दुःख मिट जाते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती। यह तिथि परम कल्याणकारी, पवित्र, सुख को देने वाली और धर्म की वृद्धि करने वाली है।

कन्या और देवी के शस्त्रों की पूजा
अष्टमी को विविध प्रकार से मां शक्ति की पूजा करें। इस दिन देवी के शस्त्रों की पूजा करनी चाहिए। इस तिथि पर विविध प्रकार से पूजा करनी चाहिए और विशेष आहुतियों के साथ देवी की प्रसन्नता के लिए हवन करवाना चाहिए। इसके साथ ही 9 कन्याओं को देवी का स्वरूप मानते हुए भोजन करवाना चाहिए। दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा को विशेष प्रसाद चढ़ाना चाहिए। पूजा के बाद रात्रि को जागरण करते हुए भजन, कीर्तन, नृत्यादि उत्सव मनाना चाहिए।

ज्योतिष के अनुसार अष्टमी है जया तिथि
ज्योतिष में अष्टमी तिथि को बलवती और व्याधि नाशक तिथि कहा गया है। इसके देवता शिवजी हैं। इसे जया तिथि भी कहा जाता है। नाम के अनुसार इस तिथि में किए गए कामों में जीत मिलती है। इस तिथि में किए गए काम हमेशा पूरे होते हैं। अष्टमी तिथि में वो काम करने चाहिए जिसमें विजय प्राप्त करनी हो। मंगलवार को अष्टमी तिथि का होना शुभ माना जाता है। वहीं श्रीकृष्ण का जन्म भी अष्टमी तिथि पर ही हुआ था।

अष्टमी पूजा के मुहूर्त
सुबह 7.15 से 9.05 तक
दोपहर 01.40 से 03.50 तक
रात 8:35 से रात 10:50 तक

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