व्रत-उपवास:पूरे साल की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य देने वाली निर्जला एकादशी पर क्या करें और क्या न करें

2 महीने पहले
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शुक्रवार, 10 जून को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस साल निर्जला एकादशी की तारीख के संबंध में पंचांग भेद हैं। कुछ जगहों पर 11 जून को किया जाएगा। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व साल भर की सभी एकादशियों में सबसे अधिक है। अन्य एकादशियों में तो व्रत करने वाले फलाहार कर सकते हैं, लेकिन इस एकादशी में जल भी ग्रहण नहीं किया जाता। ये तिथि तब आती है, जब गर्मी अपने चरम पर होती है और इस तिथि पर निर्जल रहकर व्रत किया जाता है। इस कारण ये व्रत एक तपस्या की तरह ही है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले लोग पूरे दिन भीषण गर्मी के समय में पानी भी नहीं पीते हैं, दिन के अंत तक पानी की एक-एक बूंद की कीमत समझ आने लगती है। गर्मी के दिनों में कई जगहों पर जल संकट रहता है, ऐसी स्थिति में निर्जला एकादश का व्रत हमें जल बचाने के लिए और जल का अपव्यय रोकने के लिए प्रेरित करता है। इस एकादशी पर व्रत करने से लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सभी सुविधाएं विष्णु जी की कृपा से प्राप्त हो सकती हैं।

महाभारत में बताया गया है कि सामान्य वर्ष में 24 और अधिकमास वाले वर्ष में कुल 26 एकादशियां होती हैं। अगर सभी एकादशियों पर व्रत न किया जाए और सिर्फ निर्जला एकादशी व्रत कर लिया जाए तो पूरे साल की एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य मिल सकता है।

ऐसे कर सकते हैं विष्णु जी की पूजा

  • स्नान के बाद घर के मंदिर में गणेश पूजन करें। गणेश जी को स्नान कराएं। वस्त्र, गंध, फूल, चावल, दूर्वा, भोग आदि चीजें चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें।
  • गणेश पूजा के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। विष्णु जी और देवी लक्ष्मी का आवाहन करें। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को आसन दें। दोनों देवी-देवता को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और फिर जल से कराएं।
  • भगवान को वस्त्र अर्पित करें। आभूषण और फिर यज्ञोपवित (जनेऊ) पहनाएं। पुष्पमाला पहनाएं। देवी को लाल वस्त्र अर्पित करें। सुगंधित इत्र अर्पित करें। तिलक करें। तिलक के लिए अष्टगंध का प्रयोग करें।
  • धूप-दीप जलाएं। तुलसी दल के साथ मिठाई का भोग लगाएं। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक जलाएं। आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें। पूजा में विष्णु मंत्र का जप करते रहें। मंत्र - ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय।

निर्जला एकादशी पर क्या-क्या करें

निर्जला एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को पूरे दिन निर्जल रहकर व्रत करना चाहिए। एकादशी पर स्नान के बाद भगवान के सामने व्रत करने का और पूजन करने का संकल्प लें। भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें। किसी प्याऊ में जल कलश का दान करें। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करें। इस तरह ये व्रत पूरा होता है।

निर्जला एकादशी पर क्या-क्या न करें

निर्जला व्रत करने वाले व्यक्ति को अपवित्रता से बचना चाहिए। घर में गंदगी न रखें। घर में क्लेश न करें। अगर व्रत कर रहे हैं तो दिन भर जल की एक बूंद भी ग्रहण न करें। जो लोग बीमार हैं, वृद्ध हैं, कोई स्त्री गर्भवती है या कोई अन्य शारीरिक परेशानी है तो इतना मुश्किल व्रत करने से बचना चाहिए। इस तिथि पर व्रत करने वाले व्यक्ति अगर एक बूंद भी पानी पी लेते हैं तो व्रत भंग हो जाता है।

ये है निर्जला एकादशी व्रत की कथा

महाभारत में पांडव भीम बहुत शक्तिशाली थे और वे भूख सहन नहीं कर पाते थे। सभी पांडव और द्रौपदी एकादशी का व्रत करते थे, लेकिन भीम भूख की वजह से ये व्रत नहीं कर पाते थे। तब भीम ने व्यास जी को ये बात बताई तो व्यास जी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत निर्जल रहते हुए करता है तो उसे साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य मिल सकता है। व्यास जी की बात मानकर भीम ने ये व्रत किया था। इस कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं।