आषाढ़ मास की 5 परंपराएं:सूर्य पूजा, दान-पुण्य के साथ ही इस महीने में करना चाहिए मंत्र जप, ध्यान और गुरु की पूजा

3 महीने पहले
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आषाढ़ मास शुरू हो गया है और ये महीना 13 जुलाई तक रहेगा। ये हिन्दी पंचांग का चौथा महीना है। इस महीने में सूर्य देव की पूजा करने का विशेष महत्व है। साथ ही जरूरतमंद लोगों को दान भी करना चाहिए। इस महीने से वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है, इस कारण इसे वर्षा का महीना भी कहते हैं। इन दिनों में खान-पान के संबंध में लापरवाही करने से बचना चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा से जानिए आषाढ़ से जुड़ी 5 खास परंपराएं, जिनका पालन करने से जीवन में सुख-शांति और सेहत बनी रहती है...

पहली परंपरा - आषाढ़ महीने में रोज सुबह सूर्योदय के समय से पहले उठ जाना चाहिए और सूर्योदय के समय अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। तांबे के लोटे में जल भरें, चावल और लाल फूल डालें। इसके बाद ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जप करते हुए अर्घ्य अर्पित करें।

दूसरी परंपरा - रोज सुबह पूजा करते समय मंत्र जप और ध्यान जरूर करना चाहिए। ऊँ नम: शिवाय, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, ऊँ रामदूताय नम:, कृं कृष्णाय नम:, ऊँ रां रामाय नम: मंत्र का जप किया जा सकता है। मंत्र जप के साथ ध्यान करने से नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है, विचार सकारात्मक बनते हैं। घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में ध्यान किया जा सकता है। इसके लिए किसी शांत स्थान का चयन करना चाहिए।

तीसरी परंपरा - अभी वर्षा ऋतु शुरू हो गई है। बारिश के दिनों में काफी लोगों को धन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज के साथ ही कपड़े और छाते का दान करना चाहिए। किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट की जा सकती है।

चौथी परंपरा - आषाढ़ मास कामनाओं की पूर्ति करने वाला महीना कहा जाता है। इस महीने में पौराणिक महत्व वाले मंदिरों की और प्राचीन तीर्थों की यात्रा करनी चाहिए। तीर्थ यात्रा से पुण्य लाभ के साथ ही स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं और मानसिक शांति मिलती है। दैनिक में जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

पांचवीं परंपरा - इस महीने की अंतिम तिथि पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। ये गुरु की पूजा करने का और उनका आशीर्वाद लेने का पर्व है। गुरु पूर्णिमा पर्व ये संदेश देता है कि हर स्थिति में हमें गुरु का सम्मान करना चाहिए, उनकी पूजा करें और मार्गदर्शन लेकर अपने काम करेंगे तो सफलता जरूर मिलती है।