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  • On May 12, Mohini Ekadashi, Worshiping Tulsi And Peepal With Lord Vishnu On This Day Gives The Full Fruit Of The Fast.

मोहिनी एकादशी 12 मई को:इस दिन भगवान विष्णु के साथ तुलसी और पीपल पूजा करने से मिलता है व्रत का पूरा फल

15 दिन पहले
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गुरुवार, 12 मई को लगभग पूरे दिन वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे मोहिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के साथ पीपल और तुलसी के पौधे की पूजा की भी परंपरा है। ऐसा करने से इस व्रत का पूरा फल मिलता है। पीपल में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। वहीं, तुलसी को लक्ष्मीजी का रूप माना गया है।

मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के अवतारों की विशेष पूजा करने की भी परंपरा है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास किए जाते हैं। इस व्रत में पीपल की पूजा सुबह जल्दी करने का विधान है। साथ ही सुबह और शाम दोनों समय तुलसी की पूजा की जाती है और दीपक लगाया जाता है।

पीपल पूजा: वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर पीपल की पूजा का भी खास महत्व है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल, कच्चा दूध और तिल मिलाकर पीपल को चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और पितृ भी तृप्त हो जाते हैं।

तुलसी पूजा: दूध और पानी से भगवान शालग्राम का अभिषेक करें और पूजन सामग्री चढ़ाएं। अभिषेक किए जल में से थोड़ा सा खुद पीएं और बाकी तुलसी में चढ़ा दें। इसके बाद हल्दी, चंदन, कुमकुम, अक्षत, फूल और अन्य पूजन सामग्रियों से तुलसी माता की पूजा करनी चाहिए।

जलदान से कई यज्ञों और तीर्थों का फल
ग्रंथों में बताया गया है कि इस एकादशी पर पर दान करने से गरीबी से मुक्ति मिलती है। ये भी माना जाता है कि जितना पुण्य हर तरह के दान और कई तीर्थों के दर्शन से मिलता है, उसके बराबर पुण्य वैशाख महीने की इस एकादशी पर जलदान से मिल जाता है। इसलिए इस दिन तुलसी और पीपल को जल चढ़ाना चाहिए। साथ ही पानी पिलाकर लोगों की सेवा करनी चाहिए।

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