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  • On October 2, The Ekadashi Of Pitrupaksha, The Ancestors Get Satisfaction By Worshiping Lord Vishnu And Performing Shradh.

पितृ पक्ष की एकादशी 2 अक्टूबर को:इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और श्राद्ध से पितरों को मिलती है तृप्ति

8 महीने पहले
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  • इंदिरा एकादशी पर तुलसी और गंगाजल से तर्पण करने का विशेष महत्व, इस दिन भगवान शालग्राम की पूजा का भी विधान

आश्विन महीने के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि 2 अक्टूबर को रहेगी। इसे इंदिरा एकादशी कहा जाता है। श्राद्ध पक्ष में होने के कारण ये तिथि और भी खास मानी जाती है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन करवाने से पितरों को तृप्ति मिलती है। इस दिन भगवान शालिग्राम की पूजा और व्रत रखने का विधान है।

एकादशी के स्वामी और पितरों के देवता विश्वदेव
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र का कहना है कि एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव हैं। जो कि पितरों के भी देवता होते हैं। इसलिए एकादशी तिथि पर किया गया श्राद्ध कई गुना पुण्य देने वाला और पितरों को पूरी तरह तृप्त करने वाला होता है। उन्होंने बताया कि उपनिषदों में भी कहा गया है कि भगवान विष्णु की पूजा से पितृ संतुष्ट होते हैं। यही कारण है कि इंदिरा एकादशी पर तुलसी और गंगाजल से किए गए तर्पण से पितृ प्रसन्न होते हैं।

एकादशी पर पेड़ लगाने का विधान
डॉ. मिश्र बताते हैं कि इंदिरा एकादशी का व्रत करने से पितरों को तृप्ति मिलती है। इस पर्व पर आंवला, तुलसी, अशोक, चंदन या पीपल का पेड़ लगाने से भगवान विष्णु के साथ ही पितृ भी प्रसन्न होते हैं। इससे कोई पूर्वज जाने-अनजाने में किए गए अपने किसी पाप की वजह से यमराज के पास दंड भोग रहे हों तो उन्हें इससे मुक्ति मिलती है।

सात पीढ़ियों के पितरों की तृप्ति
काशी विद्वत परिषद के मंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि इंदिरा एकादशी का व्रत करने वाले को बैकुण्ठ की प्राप्ति होती है। विष्णुधार्मोत्तर पुराण का भी कहना है कि इस एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति की सात पीढ़ियों के पितृ तृप्त हो जाते हैं। पं. द्विवेदी बताते हैं कि जितना पुण्य कन्यादान और कई सालों की तपस्या करने पर मिलता है उतना ही पुण्य एकमात्र इंदिरा एकादशी व्रत करने से मिल जाता है।

व्रत और पूजा विधि

  1. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं और पितरों की तृप्ति की कामना से सूर्य को अर्घ्य दें।
  2. भगवान विष्णु के सामने व्रत और पूजा के साथ दान और वृक्षारोपण का भी संकल्प लें।
  3. एकादशी पर भगवान शालिग्राम की पूजा की जाती है। पंचामृत से भगवान शालिग्राम का अभिषेक करें।
  4. पूजा में अबीर, गुलाल, अक्षत, यज्ञोपवीत, फूल होने चाहिए। इसके साथ ही तुलसी पत्र जरूर चढ़ाएं।
  5. तुलसी पत्र के साथ नैवेद्य लगाएं और इसके बाद एकादशी की कथा पढ़कर आरती करनी चाहिए।
  6. इस दिन पूजा और प्रसाद में तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल जरूर करें।
  7. पंचामृत और प्रसाद बांटकर ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देनी चाहिए।
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