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21 सितंबर को पितृ पक्ष की एकादशी:सूर्य को जल चढ़ाकर करें दिन की शुरुआत, सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास जलाएं दीपक, जानें एकादशी से जुड़ी परंपराएं

9 दिन पहले
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बुधवार, 21 सितंबर को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। सालभर की अन्य एकादशियों में इसका महत्व काफी अधिक है, क्योंकि ये पितृ पक्ष में आती है, इसे इंदिरा एकादशी कहते हैं। इस दिन किए गए व्रत-उपवास से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, साथ ही कुटुंब के पितर देवतों को भी तृप्ति मिलती है। ऐसी मान्यता है।

ये बातें बताई हैं उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा ने। पं. शर्मा कहते हैं, 'एक साल में कुल 24 एकादशियां आती हैं। जिस वर्ष में अधिकमास होता है, तब 26 एकादशियां एक साल में हो जाती हैं। एकादशी तिथि के स्वामी भगवान विष्णु हैं और उनके लिए ही ये व्रत किया जाता है। इस दिन विष्णु जी और श्रीकृष्ण की विशेष पूजा करने की परंपरा है।'

जानिए इंदिरा एकादशी पर सुबह से शाम तक कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं...

  • एकादशी पर सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करेंगे तो ज्यादा बेहतर रहेगा। लोटे में पानी के साथ ही चावल और लाल फूल भी डाल लेना चाहिए। अर्घ्य अर्पित करते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें।
  • सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर के मंदिर पूजा करें। आप चाहें तो किसी बड़े मंदिर में भी पूजन कर सकते हैं। भगवान विष्णु का अभिषेक करें। अभिषेक केसर मिश्रित दूध से करें। इसके लिए दक्षिणावर्ती शंख का इस्तेमाल करना चाहिए। दूध के बाद जल से अभिषेक करें। वस्त्र, तुलसी आदि शुभ चीजें अर्पित करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें।
  • दोपहर में 12 बजे के आसपास पितरों के लिए धूप-ध्यान करें। इसके लिए जलते हुए कंडों पर गुड़-घी अर्पित करना चाहिए। हथेली में पानी लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को जल चढ़ाएं।
  • धूप-ध्यान के बाद गाय, कुत्ते और कौएं के लिए घर के बाहर खाना रखना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को घर में ससम्मान भोजन कराएंगे तो बहुत अच्छा रहेगा। दान-दक्षिणा वितरीत करें।
  • दोपहर में श्रीमद् भागवत गीता का पाठ करें। आप चाहें तो गरुड़ पुराण का पाठ भी कर सकते हैं।
  • शाम को सूर्यास्त के बाद आंगन में तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रखें तुलसी के स्पर्श न करें, जल न चढ़ाएं। तुलसी को सुबह-सुबह ही जल चढ़ाना चाहिए।