संतान के लिए श्राद्ध करना है जरूरी:श्राद्ध करने से उतरता है पितृ ऋण, संतान न हो तो व्यक्ति मृत जीवन साथी के लिए कर सकता है श्राद्ध कर्म

2 महीने पहले
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पितृ पक्ष में श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण और धूप-ध्यान करना संतान के लिए जरूरी है। ऐसा करने से पितृ ऋण उतरता है। शास्त्रों में तीन तरह के ऋण बताए गए हैं- देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। पूजा-पाठ करने से देव ऋण, दान-पुण्य करने से ऋषि ऋण और श्राद्ध कर्म करने से पितृ ऋण उतरता है।

उज्जैन के भागवत कथाकार और ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा का कहना है, 'माता-पिता और घर के बुजुर्ग अपने बच्चों के सुख के लिए अपने सुख का त्याग करते हैं। बच्चों का भी कर्तव्य है कि वे भी अपने बड़ों के सुख का ध्यान रखें। घर के लोगों की मृत्यु के बाद उनके लिए श्राद्ध कर्म करना भी संतान का कर्तव्य है। ऐसा करने से बच्चों का पितृ ऋण चुकता होता है।'

संतान न हो तो कौन कर सकता है श्राद्ध कर्म

  • हर साल पितृ पक्ष में घर-परिवार के पितर देवता अपने कुटुंब के लोगों के घर आते हैं। ऐसी मान्यता है, इस भाव के साथ घर के पूर्वजों को याद करना चाहिए और उनके लिए धूप-ध्यान करना चाहिए।
  • अगर किसी मृत व्यक्ति के एक से ज्यादा पुत्र हैं और सभी एक साथ ही रहते हैं तो सबसे बड़े बेटे को श्राद्ध कर्म करना चाहिए। अगर बच्चे अलग-अलग रहते हैं तो सभी अपने-अपने घर में अलग-अलग धूप-ध्यान कर सकते हैं।
  • मृत व्यक्ति का कोई पुत्र न हो तो दामाद भी श्राद्ध कर सकता है। अगर किसी महिला के पति की मृत्यु हो गई है और उसकी कोई संतान नहीं है तो वह खुद अपने पति के लिए श्राद्ध कर सकती है।
  • अगर मृत व्यक्ति की पत्नी भी नहीं है तो उसका जीवित भाई श्राद्ध कर सकता है। व्यक्ति अपने दादा-दादी के लिए श्राद्ध कर सकते हैं।
  • पुरुष अपनी पत्नी का श्राद्ध तब ही कर सकता है जब उसकी कोई संतान न हो। पुत्र, पौत्र, पुत्री का पुत्र न होने पर भतीजा भी श्राद्ध कर सकता है। अगर गोद लिया हुआ पुत्र है या दामाद है तो वह भी श्राद्ध कर सकता है।

पितृ पक्ष में इन सभी मृत रिश्तेदारों के लिए करना चाहिए श्राद्ध कर्म

पितृ पक्ष में गुरु, ससुर, ताऊ, चाचा, मामा, भाई, बहनोई, भतीजा,‍ शिष्य, दामाद, भानजा, फूफा, मौसा, पुत्र, मित्र का भी श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध इनकी मृत्यु तिथि पर करना चाहिए। अगर इन सभी रिश्तेदारों की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या (25 सितंबर) पर श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।