पुरी के जगन्नाथ मंदिर की रसोई:यहां रोज बनते हैं 56 भोग और 10 तरह की मिठाइयां, 15 मिनट में बन जाता है 17 हजार लोगों का खाना

एक महीने पहलेलेखक: विनय भट्ट

आज पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकल रही है। इसलिए मंदिर की रसोई में लाखों लोगों का प्रसाद बनेगा। ये दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है, जहां हर रोज करीब 1 लाख लोगों का खाना बनता है। यहां भगवान को हर दिन 6 वक्त भोग लगाया जाता है, जिसमें 56 तरह के पकवान शामिल होते हैं। भोग के बाद ये महाप्रसाद मंदिर परिसर में ही मौजूद आनंद बाजार में बिकता है।

जगन्नाथ मंदिर की रसोई 11वीं शताब्दी में राजा इंद्रवर्मा के समय शुरू हुई थी। तब पुरानी रसोई मंदिर के पीछे दक्षिण में थी। जगह की कमी के कारण, मौजूदा रसोई 1682 से 1713 ई के बीच उस समय के राजा दिव्य सिंहदेव ने बनवाई थी। तब से इसी रसोई में भोग बनाया जा रहा है।

यहां कई परिवार पीढ़ियों से सिर्फ भोग बनाने का ही काम कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग महाप्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के बर्तन बनाते हैं, क्योंकि इस रसोई में बनने वाले शुद्ध और सात्विक भोग के लिए हर दिन नया बर्तन इस्तेमाल करने की परंपरा है।

क्यों है सबसे बड़ी रसोई, जानते हैं...

मसालों में जीरा, धनिया, काली मिर्च, सौंफ, तेजपत्ता, दालचीनी और सरसों का इस्तेमाल किया जाता है। मिठाई के लिए शक्कर की जगह अच्छी किस्म के गुड़ का उपयोग होता है।
मसालों में जीरा, धनिया, काली मिर्च, सौंफ, तेजपत्ता, दालचीनी और सरसों का इस्तेमाल किया जाता है। मिठाई के लिए शक्कर की जगह अच्छी किस्म के गुड़ का उपयोग होता है।

डिजाइन: विपुल किशोर शर्मा

जगन्नाथ मंदिर एक्ट के मुताबिक, मंदिर के फोटो-वीडियो किसी भी मीडिया या सोशल मीडिया में पब्लिश नहीं कर सकते। इसलिए कुछ फोटो ओडिशा गवर्नमेंट की तरफ से जारी मैगजीन से लिए गए हैं।