पूजा-पाठ:गुरुवार को एकादशी पर विष्णु के साथ ही सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास जलाएं दीपक

17 दिन पहले
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गुरुवार, 13 जनवरी को पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन संतान के सुखी और सफल जीवन की कामना से भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास और विशेष पूजा-पाठ किए जाते हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार एकादशी पर श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करना चाहिए। शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और फिर भगवान को स्नान कराएं। भगवान को प्रतिमाओं को पीले चमकीले वस्त्र पहनाएं। हार-फूल से श्रृंगार करें। चंदन का तिलक लगाएं। इत्र लगाएं। पूजा में श्रीकृष्ण के साथ ही गौमाता की प्रतिमा भी जरूर रखें। भगवान को तुलसी के पत्तों के साथ दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।

धूप-जलाएं और आरती करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय और कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में भगवान से जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें। पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें।

एकादशी पर सूर्यास्त के बाद तुलसी की भी पूजा जरूर करें। तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। तुलसी के साथ शालिग्राम की भी पूजा करें। तुलसी मंत्र का जाप करें।

मंत्र- वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतनामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलभेत।।

एकादशी पर जरूरतमंद लोगों को मौसमी फल का दान करें। अभी ठंड का समय चल रहा है तो कंबल और ऊनी वस्त्रों का दान करें। किसी गौशाला में हरी घास और गायों की देखभाल के लिए अपनी शक्ति के अनुसार धन दें। मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं।