वेद व्यास ने की थी देवी भागवत पुराण की रचना:संस्कार ही सही काम करने के लिए प्रेरित करते हैं, इसलिए संतान को अच्छे संस्कार देते रहना चाहिए

2 महीने पहले
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'द्वापर युग में राजा परीक्षित की मृत्यु सांप के डंसने से हो गई थी। परीक्षित के पुत्र राजा जनमेजय ने अपने दुखों को दूर करने के लिए और परीक्षित की आत्मा के मोक्ष के लिए देवी भागवत पुराण सुना था। वेद व्यास जी ने जनमेजय को नौ दिनों तक देवी कथा सुनाई। नौ दिनों के बाद कथा खत्म हुई, यज्ञ किया गया, इसके बाद परीक्षित की आत्मा को मोक्ष मिल गया था और जनमेजय का मन शांत हो गया था।'

ये बात देवी भागवत पुराण की शुरुआत के श्रीमद्देवी भागवत माहात्म्य अध्याय में लिखी है। इस अध्याय में सुत जी और अन्य ऋषियों की बातचीत है। सुत जी ऋषियों से कह रहे हैं, 'महाभारत में श्रीकृष्ण स्यमंतक मणि की चोरी का और प्रसेनजित की हत्या का आरोप लगा था। इन आरोपों को झूठा साबित करने के लिए श्रीकृष्ण प्रसेन की खोज में जंगल में गए थे। जब काफी दिनों तक श्रीकृष्ण लौटकर नहीं आए तो उनके पिता वसुदेव जी को चिंता होने लगी। तब उन्होंने देवी भागवत पुराण सुना था। जब कथा पूरी हुई तो श्रीकृष्ण आरोपों को झूठा साबित करके लौट आए।

आज (26 सितंबर) से नवरात्रि शुरू हो गई है और ये पर्व 4 अक्टूबर तक रहेगा। इन दिनों में पूजा-पाठ के साथ ही देवी भागवत पुराण ग्रंथ का पाठ भी किया जाता है। इस पुराण की रचना वेद व्यास जी ने की थी।

देवी भागवत पुराण के 11वें स्कंध में सदाचार के बारे में बताया है। इस अध्याय में नारद मुनि ने भगवान नारायण से पूछा था कि देवी भगवती की कृपा पाने के लिए हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। उस समय भगवान नारायण ने जो बातें नारद मुनि को बताई थीं, वही बातें आज भी हमारे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ा सकती हैं।

जानिए देवी भागवत की कुछ ऐसी नीतियां, जिनका ध्यान रखने पर हमारी सभी समस्याएं खत्म हो सकती हैं...