पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

जीवन प्रबंधन:इच्छाओं की वजह से धैर्यवान व्यक्ति भी जल्दबाजी कर देता है और परेशानियां बढ़ सकती हैं

2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • श्रीरामचरित मानस की सीख ध्यान रखेंगे तो कई समस्याओं से बच सकते हैं

इच्छाओं की वजह से व्यक्ति दिन-रात काम करता है, काफी लोग अपनी इच्छाओं को इतना महत्व देते हैं कि घर-परिवार की ओर ध्यान ही नहीं देते हैं। ऐसी स्थिति में परिवार की शांति खत्म होने लगती है, तनाव बढ़ता है। इन परेशानियों से बचने के लिए श्रीरामचरित मानस में कई सूत्र बताए गए हैं। गोस्वामी तुलसीदासजी ने श्रीरामचरित मानस में इच्छा और महत्वाकांक्षा को ही मनोरथ कहा है। तुलसीदासजी उत्तरकांड में कहते हैं कि-

कीट मनोरथ दारु सरीरा, जेहि न लाग घुन को अस धीरा।

सुत बित लोक ईषना तीनी, केहि कै मति इन्ह कृत न मलीनी।

इस चौपाई का सरल अर्थ यह है कि मनोरथ एक कीड़े समान है और ये हमारा शरीर लकड़ी की तरह ही है। ऐसा धैर्यवान कौन है, जिसके शरीर में मनोरथ नाम का ये कीड़ा न लगा हो।

तुलसीदास ने आगे बताया है कि पुत्र की, धन की और लोक प्रतिष्ठा की, इन तीन प्रबल इच्छाओं ने किसकी बुद्धि को मलीन नहीं किया यानी बिगाड़ा नहीं है। विद्वान लोग भी इन इच्छाओं के चक्कर में उलझ गए हैं। इन इच्छाओं की वजह से ही जीवन में कई तरह की परेशानियां बढ़ती हैं।

परिवार में ध्यान रखें ये बातें

परिवार में सुख-शांति चाहते हैं तो अपनी इच्छाओं को खुद पर इतना हावी नहीं होने देना चाहिए कि हमारे रिश्तों का प्रेम खत्म हो जाए। इच्छाओं को पूरा करने के चक्कर में परिवार को भूलना नहीं चाहिए। सभी सदस्यों को पूरा समय देना चाहिए, वरना व्यवसायिक जीवन में बहुत तरक्की करने के बाद भी पारिवारिक जीवन में अशांति ही रहती है। पुत्र की संतान की, धन की और लोक प्रतिष्ठा पाने की इच्छा सभी की रहती है, लेकिन इनमें उचित तालमेल बनाए रखना चाहिए।