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पितृ पक्ष से जुड़ी मान्यताएं:पितरों के धूप-ध्यान के लिए भोजन बनाते समय दूध, दही, घी, मिश्री और शहद का उपयोग जरूर करें

एक महीने पहले
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6 अक्टूबर को सर्वपितृमोक्ष अमावस्या तक पितृ पक्ष रहेगा। इन दिनों में घर-परिवार के मृत परिजनों का मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म किया जाता है। मान्यता है कि पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि शुभ काम करने से पितर देवता तृप्त होते हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार परिवार के मृत सदस्य का श्राद्ध करते समय भोजन में उनकी पसंद की चीजें बनानी चाहिए। पितरों के लिए भोजन बनाते समय दूध, दही, घी, मिश्री और शहद का उपयोग जरूर करना चाहिए।

जिस दिन परिवार के मृत सदस्य के लिए श्राद्ध कर्म करना हो, उससे एक दिन पहले ही अपने सामर्थ्य के अनुसार एक ब्राह्मण या एक से ज्यादा ब्राह्मणों को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करना चाहिए।

श्राद्ध के लिए सबसे अच्छा समय दोपहर का रहता है। 12 बजे के आसपास श्राद्ध कर्म करना चाहिए। ब्राह्मणों की देखरेख में श्राद्ध कर्म करेंगे तो गलतियां होने की संभावनाएं नहीं रहेंगी।

भोजन के लिए आमंत्रित ब्राह्मणों को खाने के लिए पितरों की दक्षिण दिशा में बैठाना चाहिए। मान्यता है कि इस दिशा में कराए गए भोजन से पितरों को तृप्ति मिलती है।

पितृ पक्ष में गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों को भी खाना देना चाहिए। श्राद्ध शुरू करने से पहले हाथ में जल, चावल, चंदन, सफेद फूल और काले तिल लेकर संकल्प लेना चाहिए।

ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद उनके माथे पर तिलक लगाएं और अपनी शक्ति के अनुसार कपड़े, अन्न और धन का दान करें। भोजन के बाद ब्राह्मणों को आदरपूर्वक घर के दरवाजे तक छोड़ने जाना चाहिए। मान्यता है कि ब्राह्मणों के साथ पितर देवता भी हमारे घर आते हैं और जब वे जाते हैं तो उनके साथ पितर देवता भी अपने पितृ लोक लौट जाते हैं। इसलिए ब्राह्मणों को आदर सहित मुख्य द्वार तक विदा करने जाना चाहिए।