देवी मां की आराधना का पर्व:गुप्त नवरात्रि में की जाती है महाविद्याओं के लिए साधना, देवी सती के क्रोध से प्रकट हुई थीं दस महाविद्याएं

एक महीने पहले
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हिन्दी पंचांग के एक साल में चार बार चैत्र मास, आषाढ़ और अश्विन और माघ मास में नवरात्रियां आती हैं। इनमें चैत्र और अश्विन मास की नवरात्रियां सामान्य होती हैं, जबकि आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रियां गुप्त होती हैं। 30 जून से आषाढ़ मास की नवरात्रि शुरू हो गई है, ये 8 जुलाई तक रहेगी। गुप्त नवरात्रि में देवी मां की दस महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए साधना की जाती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक दस महाविद्याएं देवी सती के क्रोध से प्रकट हुई थीं। ये दस महाविद्याएं के नाम हैं- काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी और कमला। इस संबंध में देवी सती और शिव जी की कथा प्रचलित है। जानिए ये कथा...

शिव जी का विवाह देवी सती से हो गया था। सती के पिता प्रजापति दक्ष शिव जी को पसंद नहीं करते थे और बार-बार उन्हें अपमानित करने का प्रयास करते रहते थे। एक बार दक्ष में एक यज्ञ आयोजित किया था। इस यज्ञ में सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया था, बस शिव जी और सती को नहीं बुलाया था।

जब ये बात देवी सती को मालूम हुई तो उन्होंने शिव जी से यज्ञ में चलने के लिए कहा। शिव जी ने सती को समझाने की कोशिश की कि प्रजापति दक्ष ने हमें आमंत्रित नहीं किया है, इस कारण हमें वहां नहीं चाहिए।

शिव जी के मना करने के बाद भी देवी सती पिता के यहां जाने कि जिद करने लगीं। सती ने कहा कि पिता के यहां जाने के लिए संतान को किसी निमंत्रण की जरूरत नहीं है। हमें वहां जाना चाहिए।

ये बातें सुनने के बाद भी शिव जी ने वहां जाने के लिए मना कर दिया। जब शिव जी ने सती को पिता के यहां जाने की अनुमति नहीं दी तो देवी क्रोधित हो गईं। देवी को क्रोध से दस महाविद्याएं काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी और कमला प्रकट हुईं।

देवी सती का क्रोध देखकर शिव जी ने उन्हें पिता के यहां जाने से नहीं रोका। देवी सती पिता दक्ष के यहां बिना बुलाई ही चली गईं। यज्ञ में प्रजापति दक्ष ने सती के सामने ही शिव जी का अपमान करना शुरू कर दिया। सती अपने पति का अपमान सहन नहीं कर सकीं और यज्ञ कुंड में कूदकर अपनी देह का अंत कर दिया।

महाविद्याओं के लिए साधना पूरी विधि से ही करें

गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए, वर्ना साधना का उल्टा असर भी हो सकता है। इसीलिए महाविद्याओं से संबंधित साधनाएं विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।