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शिव जी की भक्ति का महीना:14 जुलाई से 12 अगस्त तक रहेगा सावन, शनि कुंभ राशि में रहेगा वक्री और गुरु 29 जुलाई को मीन राशि में होगा वक्री

3 महीने पहले
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कुछ दिनों के बाद गुरुवार, 14 जुलाई से शिव जी की भक्ति का खास महीना सावन शुरू हो रहा है। ये महीना 12 अगस्त तक रहेगा। सावन में शनि अपनी खुद की राशि में वक्री रहेगा। गुरु 29 जुलाई से अपनी ही राशि मीन में वक्री हो जाएगा। सावन महीने में इन दोनों का ग्रहों अपनी-अपनी राशि में वक्री होना बहुत खास योग है। सावन में शिव जी के साथ ही, सूर्य, चंद्र, शनि और गुरु के लिए विशेष पूजा करने से सभी नौ ग्रहों के दोष दूर हो सकते हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक सावन 20 जुलाई को सूर्य पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इसके बाद अच्छी बारिश के योग बन सकते हैं। सावन हिन्दी पंचांग का पांचवां महीना है। इस महीने की अंतिम तिथि पूर्णिमा पर श्रवण नक्षत्र रहता है, इस वजह से इसे श्रावण और बोलचाल की भाषा में सावन कहा जाता है। 2 अगस्त को नाग पंचमी और 11 अगस्त को रक्षा बंधन मनाया जाएगा।

शिवलिंग पर क्यों चढ़ाई जाती हैं शीतलता देने वाली चीजें

श्रवण नक्षत्र का स्वामी चंद्र है। इस वजह से पूरे सावन माह में और खासतौर पर सोमवार को चंद्र देव की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। चंद्र का एक नाम सोम भी है, इस कारण चंद्रवार को सोमवार कहते हैं। इस बार सावन में चार सोमवार रहेंगे। चंद्र शीतलता देने वाला ग्रह है। शिव जी ने जब विषपान किया था तो उनके शरीर में गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। उस गर्मी को शांत करने के लिए शिव जी ने चंद्र को अपने माथे पर धारण किया। चंदन, बिल्व पत्र, जलाभिषेक, दूध, दही, घी आदि शीतलता देने वाली चीजें भी शिवलिंग पर इसी वजह से चढ़ाई जाती हैं।

पंचदेवों में से एक हैं शिव जी

किसी भी शुभ काम की शुरुआत पंचदेवों की पूजा के साथ की जाती है। पंचदेवों में शिव जी, विष्णु जी, गणेश जी, दुर्गा जी और सूर्य देव शामिल हैं। इस संबंध में श्री गणेश अंक में लिखा है कि आकाश तत्व के स्वामी विष्णु जी, अग्रि तत्व की स्वामी देवी दुर्गा, वायु तत्व के स्वामी सूर्य देव, पृथ्वी तत्व के स्वामी शिव जी और जल तत्व के स्वामी गणेश जी हैं। पंच तत्व अग्रि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल से मिलकर ही हमारा शरीर बना होता है। इसी वजह से पंचदेवों का महत्व काफी अधिक माना गया है।

सावन में रोज करनी चाहिए सूर्य की आराधना

सावन माह में रोज सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए और सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। सावन में अधिकतर जगहों पर बारिश की वजह से सूर्य के दर्शन नहीं हो पाते हैं, ऐसी स्थिति सूर्य की प्रतिमा या तस्वीर के दर्शन करना चाहिए और पूर्व दिशा की ओर मुंह करके अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। इस दौरान सूर्य के मंत्र ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करना चाहिए।

शनि और गुरु ग्रह के लिए करें ये शुभ काम

सावन माह में शनि के लिए हर शनिवार को तेल और काले तिल का दान करें। जरूरतमंद लोगों को छाते का और जूते-चप्पल का दान करें। गुरु ग्रह के लिए हल्दी और चने की दाल का दान करना चाहिए। शिवलिंग पर बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।