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  • Shani Amavasya July 2021 Date And Tithi Time | All You Need To Know About Shanichari Amavasya Importance And Significance

साल की दूसरी शनिचरी अमावस्या 10 को:इस पर्व पर तीर्थ स्नान और दान से खत्म होते हैं जाने-अनजाने में हुए पाप

एक महीने पहले
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  • शनि अमावस्या पर पानी में काले तिल मिलाकर नहाने से शनि दोष में आती है कमी, पीपल में तिल चढ़ाने से दूर होता है पितृ दोष

10 जुलाई को आषाढ़ महीने की अमावस्या रहेगी। इस दिन शनिवार होने से इसका फल और बढ़ गया है। जिससे इसे शनैश्चरी या शनिचरी अमावस्या कहा जाएगा। शनिवार को अमावस्या तिथि सूर्योदय के कुछ देर बाद तक रहेगी। इसलिए इस दिन तीर्थों और पवित्र नदियों में स्नान करने और दान का महत्व रहेगा। इस दिन तीर्थ स्नान करने या घर पर ही नहाने के पानी में पवित्र नदियों का जल मिलाकर नहाने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं।

शनि अमावस्या पर क्या करें
इस पर्व पर सूर्योदय से पहले उठकर नहाना चाहिए। संक्रमण से बचने के लिए घर पर ही पानी में गंगाजल या किसी पवित्र नदी का जल मिलाकर नहाएं। इसके बाद श्रद्धा के मुताबिक दान करने का संकल्प लेना चाहिए। फिर जरुरतमंद लोगों को दान देना चाहिए। इस दिन तेल, जूते-चप्पल, लकड़ी का पलंग, छाता, काले कपड़े और उड़द की दाल का दान करने से कुंडली में मौजूद शनि दोष खत्म हो जाता है।

तिल स्नान से दूर होंगे दोष
शनिचरी अमावस्या पर पानी में गंगाजल या किसी पवित्र नदी के जल के साथ तिल मिलाकर नहाना चाहिए। ऐसा करने से कई तरह के दोष दूर होते हैं। शनिचरी अमावस्या पर पानी में काले तिल डालकर नहाने से शनि दोष दूर होता है। इस दिन काले कपड़े में काले तिल रखकर दान देने से साढ़ेसाती और ढय्या से परेशान लोगों को राहत मिल सकती है। साथ ही एक लोटे में पानी और दूध के साथ सफेद तिल मिलाकर पीपल पर चढ़ाने से पितृ दोष का असर कम होने लगता है।

शनिचरी अमावस्या
ग्रंथों में बताया गया है कि शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या शुभ फल देती है। इस तिथि पर तीर्थ स्नान और दान का कई गुना पुण्य फल मिलता है। अमावस्या शनि देव की जन्म तिथि भी है। इसलिए इस दिन शनिदेव के पीपल के पेड़ की पूजा करने से कुंडली में मौजूद शनि दोष खत्म होते हैं। इस दिन शनि देव की कृपा पाने के लिए व्रत रखना चाहिए और जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाना चाहिए।

साल की दूसरी शनि अमावस्या
किसी भी महीने की अमावस्या अगर शनिवार को पड़ती है तो उसे शनिचरी अमावस्या कहा जाता है। ग्रंथों के मुताबिक ऐसी अमावस्या शुभ फल देने वाली होती है। ऐसे संयोग में किए गए स्नान-दान और का पुण्य फल और भी बढ़ जाता है। शनिवार को अमावस्या का संयोग कम ही बनता है। इस साल 13 मार्च को शनिवार के दिन अमावस्या थी। अब 10 जुलाई को ऐसा योग बन रहा है। इसके बाद ऐसा संयोग साल के आखिरी में बनेगा। 4 दिसंबर को इस साल की आखिरी शनि अमावस्या रहेगी।

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