वक्री शनि का होगा मकर में प्रवेश:सूर्य पुत्र हैं शनि, लेकिन पिता से ही रखते हैं शत्रुता; जानिए शनि देव को क्यों चढ़ाया जाता है तेल

एक महीने पहले
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नौ ग्रहों में से एक ग्रह शनि राशि बदलकर कुंभ से मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस राशि परिवर्तन की तारीख के संबंध में पंचांग भेद हैं। कुछ पंचांग में 12 जुलाई और कुछ में 13 जुलाई को शनि का राशि परिवर्तन बताया गया है। शनि इस समय वक्री है और इसी वजह से कुंभ से पीछे की ओर मकर राशि में आ रहा है। शनि 23 अक्टूबर को मकर राशि में मार्गी होगा। इस राशि परिवर्तन की वजह से कई लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। शनि के अशुभ असरों से बचने के लिए शनि देव को तेल चढ़ाना चाहिए और शनिवार को तेल का दान करना चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनि देव सूर्य के पुत्र हैं, लेकिन वे अपने पिता सूर्य से शत्रुता का भाव रखते हैं। इस संबंध में मान्यता है कि सूर्य का विवाह संज्ञा नाम की देव कन्या से हुआ था। संज्ञा प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं।

यमराज और यमुना संज्ञा और सूर्य देव की संतानें हैं। संज्ञा सूर्य का तेज सहन नहीं कर पा रही थीं। तब उन्होंने अपनी छाया को सूर्य देव की सेवा में लगा दिया और सूर्य देव को बताए बिना किसी और जगह चली गईं। बाद में सूर्य और छाया के पुत्र के रूप में शनि देव का जन्म हुआ। जब सूर्य को छाया के बारे में मालुम हुआ तो उन्होंने शनि देव के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। जिससे शनि उन्हें शत्रु मानने लगे थे। शनि देव ने तप करके शिव जी को प्रसन्न किया और ग्रह के रूप में न्यायाधीश का पद प्राप्त किया था।

शनि देव को तेल क्यों चढ़ाते हैं?

इस परंपरा के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के मुताबिक रावण ने सभी ग्रहों को अपने अधीन कर लिया था। रावण शनि देव को बहुत प्रताड़ित करता था। जिससे शनि देव को बहुत पीड़ा होती थी। जब हनुमान जी लंका पहुंचे थे तो उन्होंने शनि देव के शरीर पर लगाने के लिए तेल दिया था। ये तेल लगाने से शनि देव की पीड़ा दूर हो गई थी।

एक अन्य कथा के मुताबिक एक बार शनि देव को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया तो वे हनुमान जी से युद्ध करने पहुंच गए। हनुमान जी ने शनि को युद्ध में पराजित कर दिया। हनुमान जी के प्रहारों से शनि को बहुत पीड़ा हो रही थी। उस हनुमान जी ने शनि को शरीर पर लगाने के लिए तेल दिया था। तेल लगाने के बाद शनि देव की पीड़ा शांत हो गई थी। ऐसी ही मान्यताओं की वजह से शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है।