स्नान-दान और पूजा का पर्व:शनिश्चरी अमावस्या 4 दिसंबर को इस दिन खत्म होगा अगहन मास का कृष्ण पक्ष

2 महीने पहले
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  • इस अमावस्या पर पितरों के लिए धूप-ध्यान करें और काले तिल का दान करें

4 दिसंबर को अगहन मास की अमावस्या है। इस दिन मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष खत्म होगा और 5 तारीख से शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा। 3 तारीख की शाम करीब 5 बजे से अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी, लेकिन ये पर्व 4 को मनाया जाएगा।

ज्योतिषीयों के मुताबिक सूर्योदय जिस तिथि में होता है, उस दिन स्नान-दान और पितृ कर्म किए जाने चाहिए। 4 तारीख को सूर्योदय के वक्त अमावस्या तिथि रहेगी और दोपहर 1.15 पर मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू होगी। इसीलिए शनिवार को ही अमावस्या पर्व मनाया जाएगा और इसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है।

पितरों के लिए 12 बजे करें धूप-ध्यान
अमावस्या की दोपहर करीब 12 बजे पितरों के लिए धूप-ध्यान करें। इसके लिए गोबर का कंडा जलाएं और जब धुआं निकलना बंद हो जाए, तब अंगारों पर गुड़-घी डालकर धूप दें। धूप देते समय पितरों का ध्यान करें। जरूरतमंद लोगों को खाना दान करें।

पवित्र नदी में स्नान करने की है परंपरा
अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने और तीर्थ दर्शन करने की परंपरा है। अगर इस दिन किसी नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान करते समय सभी नदियों का तीर्थों का ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य फल मिल सकता है।

शनि के मंत्र का करें जाप
शनिवार और अमावस्या के योग में शनिदेव के अलावा पितर देवता के लिए भी विशेष धूप-ध्यान जरूर करें। शनिदेव के लिए तेल का दान करें। ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें। तिल के तेल या सरसों के तेल का दीपक जलाएं और मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। शनिदेव के लिए काले वस्त्र और काले कंबल का भी दान करना चाहिए।

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