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उत्सव:शीतला माता करती हैं गधे की सवारी और पहनती हैं नीम के पत्तों की माला, ये हैं देवी मां से जुड़ी खास बातें

16 दिन पहले
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रविवार, 4 अप्रैल को शीतला माता की पूजा का महापर्व मनाया जा रहा है। जो लोग देवी मां की पूजा करते हैं, वे पूरे दिन ठंडा यानी बासी खाना ही खाते हैं। हिन्दी पंचांगों में भेद की वजह से कुछ जगहों पर रविवार को शीतला सप्तमी तिथि मनाई जा रही है, जबकि कुछ पंचांगों में रविवार को शीतला अष्टमी बताई गई है। ऐसी स्थिति में अपने क्षेत्र के पंचांग में बताई गई तिथि के आधार पर ये पर्व मनाया जा सकता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा से जानिए शीतला माता से जुड़ी खास बातें और शीतला सप्तमी और अष्टमी पर ठंडा भोजन क्यों करना चाहिए...

शीतला माता गधे की सवारी करती हैं, उनके हाथों में कलश, झाड़ू, सूप (सूपड़ा) रहते हैं और वे नीम के पत्तों की माला धारण करती हैं। देवी मां ठंडे खाने का भोग लगाने की परंपरा है।

देवी मां का ये स्वरूप साफ-सफाई का महत्व दर्शाता है। जो साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं, उन्हें कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। देवी मां का यही संदेश है कि अपने घर में और घर के आसपास अच्छी तरह सफाई रखें।

इस मौसम में नीम के पत्तियों का सेवन करने से कई मौसमी बीमारियों से रक्षा हो जाती है। नीम की पत्तियां में पानी में मिलाकर स्नान भी कर सकते हैं। इससे त्वचा से संबंधित कई रोग दूर होते हैं।

शीतला सप्तमी और अष्टमी तिथि सर्दी और गर्मी के संधिकाल में आती है। अभी शीत ऋतु के जाने का और ग्रीष्म ऋतु के आने का समय है। पं. शर्मा के मुताबिक दो ऋतुओं के संधिकाल में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

ऋतुओं के संधिकाल में आवश्यक सावधानी रखी जाती है तो कई मौसमी बीमारियों से बचाव हो जाता है। अभी खान-पान में की गई लापरवाही स्वास्थ्य के लिए ज्यादा नुकसानदायक होती है।

इन तिथियों पर शीतला माता के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत का पालन करने वाले लोग इन दिनों में बासी यानी ठंडा खाना ही खाते हैं। सप्तमी या अष्टमी पर ठंडा खाना खाने से उन्हें ठंड के प्रकोप से होने वाली कफ संबंधी बीमारियां होने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं।

वर्ष में एक दिन सर्दी और गर्मी के संधिकाल में ठंडा भोजन करने से पेट और पाचन तंत्र को भी लाभ मिलता है। कई लोग को ठंड के कारण बुखार, फोड़े-फुंसी, आंखों से संबंधित परेशानियां आदि होने की संभावनाएं रहती हैं, उन्हें हर साल शीतला सप्तमी या अष्टमी पर बासी भोजन करना चाहिए। शीतला माता की पूजा करने वाले लोगों को इन तिथियों पर गर्म भोजन करने से बचना चाहिए।

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