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पितृ पक्ष की एकादशी शनिवार को:सुबह करें विष्णु जी और महालक्ष्मी की पूजा, दोपहर में पितरों के लिए श्राद्ध कर्म और शाम को करें तुलसी पूजन

2 महीने पहले
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आज (शनिवार, 2 अक्टूबर) पितृ पक्ष की एकादशी है। अश्विन माह के कृष्ण पक्ष में इंदिरा एकादशी का व्रत किया जाता है। पितृ पक्ष की एकादशी का महत्व काफी अधिक है। इस तिथि पर विष्णु जी और देवी लक्ष्मी पूजा और पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जिन लोगों ने संन्यास अपना लिया था और उनकी मृत्यु हो गई, अगर उनकी मृत्यु तिथि मालूम न हो तो ऐसे मृत लोगों का श्राद्ध कर्म पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी पर किया जाता है।

शनिवार को सुबह स्नान के बाद विष्णु जी के सामने व्रत करने और पूजा करने का संकल्प लेना चाहिए। विष्णु जी और देवी लक्ष्मी का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। इसके लिए केसर मिश्रित दूध शंख में भरें और देवी-देवता को अर्पित करें। इस दौरान ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। अभिषेक के बाद शुद्ध जल चढ़ाएं। इसके बाद वस्त्र, पुष्प हार आदि चढ़ाएं, तिलक लगाएं और अन्य श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।

विष्णु जी और लक्ष्मी जी के सामने धूप-दीप जलाएं। मिठाई का भोग लगाएं। कर्पूर जलाकर आरती करें। इस तरह पूजा करने के बाद भगवान से पूजन में हुई जानी-अनजानी भूल के लिए क्षमा याचना करें। पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें और खुद भी ग्रहण करें।

ऐसे कर सकते हैं श्राद्ध कर्म

परिवार के जिन लोगों की मृत्यु एकादशी तिथि पर हुई है, उनके लिए श्राद्ध कर्म शनिवार, 2 अक्टूबर की दोपहर में करीब 12 बजे करें। गाय के गोबर से बने कंडे के अंगारों पर गुड़-घी और भोजन अर्पित करें, पितरों का ध्यान करें। हाथ में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित करें। इस दिन किसी गौशाला में धन और हरी घास का दान करें। घर की छत पर कौओं के लिए और घर के बाहर कुत्तों के लिए खाना रखें।

एकादशी पर करनी चाहिए तुलसी की विशेष पूजा

हर एकादशी पर तुलसी की विशेष जरूर करनी चाहिए। तुलसी के साथ ही शालीग्राम की भी पूजा करें। शनिवार को सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रखें शाम को तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

शनिवार और एकादशी के योग में कर सकते हैं ये शुभ काम भी

हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं और दीपक जलाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। बाल गोपाल का अभिषेक करें। तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप करें।